36 वर्षों की गौरवशाली सेवा के बाद शिक्षा-दीप प्राचार्य नवल किशोर शुक्ला होंगे 26 अक्टूबर को सेवानिवृत्त — विद्यालय परिवार ने तैयार किया भावनाओं से भरा विदाई समारोह






कोरबा। शिक्षा केवल ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन की दिशा तय करने वाली वह ज्योति है जो समाज को विकास की राह पर अग्रसर करती है। इसी शिक्षा-ज्योति को 36 वर्षों तक प्रज्ज्वलित करने वाले सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (एचटीपीपी, पश्चिम) दर्री, कोरबा के प्राचार्य नवल किशोर शुक्ला अब अपनी सेवाओं की यह गौरवशाली यात्रा पूर्ण कर 26 अक्टूबर 2025 (रविवार) को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
आचार्य श्री शुक्ला ने अपने शिक्षकीय जीवन में अनगिनत विद्यार्थियों के जीवन को दिशा देने का कार्य किया है। उन्होंने सदैव शिक्षा को एक साधना के रूप में अपनाया और “विद्या ददाति विनयम्” के आदर्श को चरितार्थ किया। 36 वर्षों की इस लम्बी यात्रा में उन्होंने न केवल विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता को ऊँचाई दी, बल्कि विद्यार्थियों में अनुशासन, संस्कार और समाजसेवा की भावना का संचार भी किया।
अब जबकि उनकी सेवानिवृत्ति का दिन नजदीक है, विद्यालय परिवार, पूर्व छात्रगण और अभिभावक वर्ग उनके सम्मान में विदाई समारोह को यादगार बनाने की तैयारियों में जुटे हैं।
समारोह का आयोजन 26 अक्टूबर, रविवार सुबह 11 बजे से विद्यालय परिसर में किया जाएगा। इससे पूर्व प्राचार्य शुक्ला अपनी धर्मपत्नी श्रीमती चेतना शुक्ला एवं पुत्री शिवानी शुक्ला के साथ अपने निवास से निकली अभिनंदन रैली में शामिल होंगे। उनके प्रिय शिष्य, सहकर्मी और परिजन रैली में सम्मिलित होकर उन्हें विद्यालय तक साथ लेकर जाएंगे।
विद्यालय पहुंचने पर छात्रों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों, गीत-संगीत और सम्मान-अभिनंदन के माध्यम से यह दिन भावनाओं से भरा होगा। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के शिक्षकगण और पूर्व विद्यार्थी अपने अनुभवों और संस्मरणों को साझा करेंगे — कैसे एक गुरु ने अपने मार्गदर्शन से सैकड़ों विद्यार्थियों के भविष्य को आलोकित किया।
कार्यक्रम के अंत में सामूहिक दोपहर भोज एवं “चाय पर चर्चा” का आयोजन होगा। इसके बाद विद्यालय से निवास तक “आभार रैली” निकालकर इस भावुक अवसर का समापन किया जाएगा।
पूर्व छात्रों ने आग्रह किया है कि इस ऐतिहासिक क्षण में सभी सम्मानित शिक्षक, अभिभावक, पूर्व और वर्तमान विद्यार्थी बड़ी संख्या में शामिल होकर अपने प्रिय गुरुजन को स्नेह, सम्मान और शुभकामनाओं का उपहार दें।
प्राचार्य नवल किशोर शुक्ला — एक नाम जो न केवल शिक्षा, अनुशासन और संस्कार का प्रतीक रहा, बल्कि जिसने 36 वर्षों तक अपनी कर्मनिष्ठा से यह सिद्ध किया कि शिक्षक वास्तव में समाज के मार्गदर्शक होते हैं।





