श्री सप्तदेव मंदिर में पाँच शक्तिपीठों के पावन ज्योत कलशों का भव्य आगमन, भक्तों ने किया दर्शन


कोरबा, 20-21 सितंबर 2025: देवभूमि कोरबा की पावन धरती शनिवार और रविवार को ऐतिहासिक और अलौकिक दृश्य की साक्षी बनी, जब देशभर के पाँच प्रमुख शक्तिपीठों से लाए गए पावन ज्योत कलशों का श्री सप्तदेव मंदिर परिसर में भव्य आगमन हुआ।
देश के सात मुख्य शक्तिपीठों में से पाँच शक्तिपीठों — उत्तर से जम्मू-कश्मीर स्थित माँ वैष्णो देवी धाम, दक्षिण से कांचीपुरम स्थित माँ कामाक्षी देवी, पूर्व से असम स्थित माँ कामाख्या देवी, पश्चिम से गुजरात स्थित पावागढ़ की माँ कालिका देवी और मध्य भारत से सतना जिले के मैहर स्थित माँ शारदा भवानी धाम — के ज्योत कलशों का मंदिर परिसर में विधिवत स्वागत किया गया।
मंदिर ट्रस्टी श्री अशोक मोदी ने बताया कि यह अवसर कोरबा नगरवासियों के लिए किसी सौभाग्य से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि माँ श्री राणीसती दादी जी की कृपा से ही यह दुर्लभ घटना संभव हुई है। उन्होंने बताया कि मंदिर के नवनिर्माण के बाद दादी जी की कृपा से कोरबा में अनेक चमत्कार घटित हुए हैं, और इस अवसर ने भक्तों को विशेष पुण्य एवं आशीर्वाद प्रदान किया।
दिनांक 20 सितंबर, शनिवार को शाम 6 बजे मंदिर प्रांगण में विधिवत पूजन और आरती के पश्चात पाँचों शक्तिपीठों के ज्योत कलशों को माँ श्री राणीसती दादी के मंड पर स्थापित किया गया। मंदिर के इतिहास में यह पहला अवसर था जब सभी पाँच कलश एक साथ दादी जी के मंड पर विराजित हुए। भक्तों ने इसे अद्भुत और चमत्कारी अनुभव बताया।
रविवार, 21 सितंबर को प्रातःकाल विशेष अनुष्ठान और पूजा-अर्चना के बाद इन ज्योत कलशों को देवपहरी हेतु प्रस्थान किया गया। देवपहरी में निर्माणाधीन हिंगलाज मंदिर में इन पाँचों शक्तिपीठों की ज्योत कलशों की स्थापना की जाएगी।
इस ऐतिहासिक अवसर में श्री सप्तदेव मंदिर महिला मंडल समिति, ट्रस्ट परिवार, कृष्णा ग्रुप, छत्तीसगढ़ प्रांतीय अग्रवाल संगठन, अग्रवाल महिला मंडल समिति, विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और गौ सेवा धाम समिति देवपहरी सहित अनेक सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों ने सक्रिय सहयोग और अपना बहुमूल्य समय प्रदान किया।
भक्तों और नगरवासियों के लिए यह अवसर एक दुर्लभ और अविस्मरणीय अनुभव रहा, जिसने कोरबा को देशभर के धार्मिक एवं आध्यात्मिक केंद्रों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

