August 15, 2026

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स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने किया बीएमसी का तीसरा कैंसर कॉन्क्लेव उद्घाटन, सात देशों के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

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त्रिनेत्र टाइम्स रायपुर, 19 सितंबर 2025। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्वास्थ्य क्षेत्र की एक ऐतिहासिक पहल के तहत बालको मेडिकल सेंटर (बीएमसी) ने तीसरे वार्षिक छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव 2025 का भव्य शुभारंभ किया। इस अवसर पर माननीय श्री श्याम बिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।


कार्यक्रम की शुरुआत सिर एवं गर्दन के जटिल कैंसर की लाइव सर्जिकल डेमोन्स्ट्रेशन से हुई, जिसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कैंसर विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। प्रतिभागियों को अत्याधुनिक तकनीकों, जटिल सर्जिकल निर्णयों और नए उपचार पद्धतियों के बारे में प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ।
इस कार्यशाला का नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कैंसर विशेषज्ञ डॉ. अनिल डी’क्रूज़, निदेशक ऑन्कोलॉजी, अपोलो हॉस्पिटल्स (दिल्ली, मुंबई, चेन्नई) तथा डॉ. गौरी पंतवैद्य, प्रोफेसर एवं प्रमुख, सिर एवं गर्दन ऑन्कोसर्जरी विभाग, टाटा मेमोरियल सेंटर, मुंबई ने किया। देशभर के अग्रणी कैंसर संस्थानों से जुड़े वरिष्ठ कैंसर सर्जनों ने भी अपनी विशेषज्ञता साझा की और प्रतिभागियों को जटिल निर्णय लेने की बारीकियों से अवगत कराया।


डॉ. अनिल डी’क्रूज़ ने चर्चा में कहा कि पिछले तीन दशकों में कैंसर की घटनाओं में तेजी से वृद्धि हुई है, विशेषकर थायरॉइड कैंसर के मामलों में तीन गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा—“थायरॉइड कैंसर का सही इलाज होने पर 99 प्रतिशत मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं। लेकिन यदि सर्जरी प्रशिक्षित और अनुभवी सर्जनों द्वारा न की जाए तो यह आवाज़, कैल्शियम संतुलन, पैराथायरॉयड कार्यप्रणाली और दीर्घकालिक नियंत्रण पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। इसलिए हर सर्जन को साल में कम से कम 50-60 ऐसी सर्जरी का अनुभव होना चाहिए।”
माननीय स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अपने संबोधन में कहा—“यह छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है कि बीएमसी कैंसर कॉन्क्लेव 2025 सात देशों और पूरे भारत से आए विशेषज्ञों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं की मेजबानी कर रहा है। यह आयोजन केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य भारत को स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगा। यह पहल वैश्विक अनुभव और स्थानीय जरूरतों को जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।”
बीएमसी के सीनियर कंसल्टेंट एवं प्रमुख, सर्जरी विभाग डॉ. दिवाकर पांडे ने बताया कि कैंसर सर्जरी केवल ट्यूमर को हटाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि चेहरे की संरचना, जबड़े की हड्डी का पुनर्निर्माण और मरीज की मूलभूत क्रियाओं जैसे बोलना, खाना और सांस लेना बहाल करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसे इलाज से मरीज सामान्य जीवन जीने में सक्षम हो पाता है और समाज में आत्मविश्वास के साथ लौटता है।
वेदांता मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन (बालको मेडिकल सेंटर) की चिकित्सा निदेशक डॉ. भावना सिरोही ने कहा कि “कैंसर केयर का मानकीकरण बेहद जरूरी है। छत्तीसगढ़ और मध्य भारत के मरीजों को भी वही गुणवत्तापूर्ण इलाज मिलना चाहिए जो दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे महानगरों में मिलता है। स्थानीय युवा सर्जनों को प्रशिक्षित कर स्थानीय क्षमता का निर्माण ही सबसे प्रभावी समाधान है और बीएमसी इसी दिशा में लगातार प्रयासरत है।”
लाइव सर्जिकल डेमोन्स्ट्रेशन में देशभर से आए 150 से अधिक सर्जन और चिकित्सकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में सिर एवं गर्दन कैंसर के मल्टीडिसिप्लिनरी मैनेजमेंट पर शैक्षणिक व्याख्यान और पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसमें विशेषज्ञों ने नवीनतम उपचार पद्धतियों पर गहन विचार-विमर्श किया।
👉 इस प्रकार, बीएमसी छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव 2025 ने न केवल प्रदेश को चिकित्सा क्षेत्र में नई पहचान दी, बल्कि कैंसर उपचार और अनुसंधान को मध्य भारत में नई दिशा देने का मार्ग भी प्रशस्त किया।

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