February 12, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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जनसंपर्क अधिकारी के विवादित कदम से पत्रकारिता पर उठे सवाल : नोटिस, धमकी व अपमान का आरोप, प्रशासन की चुप्पी से बढ़ा विवाद

 

त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ***/ जशपुरनगर, 06 सितंबर 2025 — पत्रकारिता की स्वतंत्रता व गरिमा पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए एक गंभीर विवाद सामने आया है। जनसंपर्क अधिकारी नूतन सिदार के कथित विवादित रवैये को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं, जिसमें स्थानीय पत्रकारों के खिलाफ मानहानि नोटिस, धमकी और अपमानजनक व्यवहार की शिकायत की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, जनसंपर्क अधिकारी नूतन सिदार के कर्मचारी श्री रविन्द्र द्वारा थाने व पुलिस अधीक्षक कार्यालय में दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर पत्रकारों पर आक्रामक कार्रवाई की गई। पत्रकारों को एक-एक करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा गया है। इतना ही नहीं, कुछ पत्रकारों को फ़ोन पर धमकी दी गई कि आत्महत्या कर फंसाया जा सकता है। यह कदम पत्रकारिता पर दबाव बनाने और उनकी आवाज़ को दबाने की साजिश के रूप में देखा जा रहा है।
नोटिस भेजने के साथ-साथ पत्रकारों को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया और उन्हें अपराधी बताकर एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई। एक जनसंपर्क ग्रुप में इस विवादित नोटिस को पोस्ट करते हुए आपत्तिजनक टिप्पणियाँ भी की गईं, जिसमें यह तक लिखा गया — “कोई पोर्टल छूटा तो नहीं?”। ग्रुप में मौजूद कुछ कथित पत्रकारों ने इस पोस्ट पर ‘लाईक’ भी किया, जिससे सवाल खड़े हो रहे हैं।
विशेष रूप से ध्यान देने वाली बात यह है कि यह जनसंपर्क ग्रुप प्रशासनिक सूचना साझा करने का माध्यम माना जाता था, लेकिन अब इसके निजीकरण की चर्चा हो रही है। आरोप लगाया जा रहा है कि जनसंपर्क अधिकारी नूतन सिदार अपने चहेतों को ही ग्रुप में बनाए रखकर निजी स्वार्थ के लिए इसका उपयोग कर रही हैं। वहीं, उन पत्रकारों को ग्रुप से बाहर किया जा रहा है जो उनके रुख से असहमत हैं।
हालांकि, शासन प्रशासन की ओर से अभी तक इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। उल्लेखनीय है कि कलेक्टर रोहित व्यास भी उक्त जनसंपर्क ग्रुप का हिस्सा हैं, और इसका स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। इस कारण मामले की संवेदनशीलता और भी बढ़ गई है।
यह विवाद न केवल कुछ पत्रकारों पर हमलों तक सीमित नजर आता है, बल्कि इसे पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर हमला भी माना जा रहा है। स्वतंत्र प्रेस को दबाने की यह कोशिश लोकतंत्र के लिए खतरे का संकेत भी कही जा रही है। इस पूरे मामले पर प्रशासनिक समीक्षा की मांग उठ रही है, ताकि उचित निष्पक्ष जांच के बाद स्पष्टता आ सके।
👉 आगे की रिपोर्टिंग पर निगरानी: समाज व प्रेस संगठनों द्वारा इस घटना की गंभीरता को देखते हुए आगामी दिनों में प्रशासनिक स्तर पर स्पष्टीकरण देने की संभावना बनी हुई है। पत्रकार संगठन भी इस मुद्दे पर सक्रियता दिखा रहे हैं।

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