“विकसित भारत @2047 का मंत्र: स्वयं को श्रेष्ठ बनाओ— पर्यावरण संरक्षण, जल बचाव और सामाजिक समरसता का दिया संदेश”


त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//**कोरबा देश और समाज को सही दिशा में आगे बढ़ाने के लिए सबसे पहले प्रत्येक नागरिक को स्वयं को श्रेष्ठ बनाने की दिशा में प्रयास करना होगा। यदि हम अपने जीवन में पांच मूलभूत संकल्प—पेड़ लगाना, पानी बचाना, सिंगल यूज प्लास्टिक का त्याग करना, भेदभाव छोड़कर सामाजिक समरसता अपनाना और आत्मबोध विकसित करना—को दृढ़ता से अपना लें, तो न केवल व्यक्तिगत जीवन श्रेष्ठ बनेगा, बल्कि विकसित भारत @2047 का लक्ष्य भी साकार हो सकेगा।

ये प्रेरक विचार मध्यप्रदेश के शासकीय शिक्षा महाविद्यालय, रीवा से पधारे वरिष्ठ एवं अनुभवी प्राध्यापक डॉ. हरिशचंद्र द्विवेदी ने कमला नेहरू महाविद्यालय, कोरबा के शिक्षा संकाय में आयोजित बौद्धिक सत्र के दौरान बीएड प्रशिक्षार्थियों को मार्गदर्शन देते हुए व्यक्त किए। गुरुवार को आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि केवल डिग्री हासिल कर लेना ही शिक्षा का उद्देश्य नहीं है, बल्कि स्वयं को जिम्मेदार, संवेदनशील और कुशल नागरिक के रूप में गढ़ना भी उतना ही आवश्यक है। तभी भारत जैसे विकासशील देश को विकसित भारत के शिखर तक पहुँचाया जा सकता है।
डॉ. द्विवेदी ने अपने प्रेरक संबोधन में पांच गूढ़ जीवन सूत्रों को विस्तार से रेखांकित करते हुए कहा कि—
प्रथम, हमें यह स्वीकार करना होगा कि धरती हमारी माता है। विश्वबंधुत्व की भावना विकसित होने पर व्यक्ति न भ्रष्टाचार की ओर झुकेगा, न किसी को कमतर आँकेगा और न ही भेदभाव की मानसिकता रखेगा। इससे सामाजिक एकता मजबूत होगी।
द्वितीय, अपनी संस्कृति, भाषा, वेशभूषा और भवन का सम्मान करें। मातृभाषा व राष्ट्रभाषा के प्रयोग से सांस्कृतिक आत्मगौरव विकसित होता है।
तृतीय, प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण को नैतिक दायित्व मानते हुए अधिकाधिक पौधरोपण करें तथा सिंगल यूज प्लास्टिक को जीवन से बाहर करें।
चतुर्थ, जल संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाएं, अपने कौशल का निरंतर विकास करें और किसी भी कार्य को छोटा न समझें—हर श्रम का अपना सम्मान होता है।
पंचम और सर्वाधिक महत्वपूर्ण, भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल बचाएं, क्योंकि “बिन पानी सब सून” केवल कहावत नहीं, आने वाले समय की सच्चाई है।

कार्यक्रम में अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के वाणिज्य एवं वित्तीय अध्ययन विभाग के प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अतुल कुमार दुबे भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने प्रशिक्षार्थियों को समकालीन शिक्षा व्यवस्था, मूल्यपरक शिक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व पर मार्गदर्शन प्रदान किया। इस अवसर पर महाविद्यालय परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया।
सम्मान एवं सहभागिता
कार्यक्रम के समापन पर कमला नेहरू महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रशांत बोपापुरकर एवं शिक्षा संकाय की विभागाध्यक्ष डॉ. भारती कुलदीप द्वारा डॉ. हरिशचंद्र द्विवेदी एवं डॉ. अतुल कुमार दुबे का शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मान किया गया। कार्यक्रम में श्री अग्रसेन कन्या महाविद्यालय, कोरबा की सहायक प्राध्यापक डॉ. किरण वाजपेयी, डॉ. अंजू खेस्स, श्रीमती प्रीति द्विवेदी, नितेश यादव, शंकर यादव, राकेश गौतम एवं कुणाल दासगुप्ता सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी-प्रशिक्षार्थियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
इस बौद्धिक सत्र ने विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, आत्मबोध और राष्ट्रनिर्माण के प्रति नई चेतना का संचार किया।

