भगवान सप्तदेव के चरणों में नतमस्तक हुए प्रख्यात कथाकार विजय शंकर मेहता


कोरबा। दिनांक 27 अगस्त 2025, दिन बुधवार को रात्रि 8.00 बजे श्री सप्तदेव मंदिर में एक अत्यंत पावन और भावनात्मक क्षण उपस्थित हुआ। इस अवसर पर देश के प्रख्यात कथाकार एवं आध्यात्मिक चिंतक श्री विजय शंकर मेहता जी ने भगवान सप्तदेव के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
विदित हो कि इन दिनों श्री मेहता जी कोरबा के जश्न रिसोर्ट में आयोजित श्रीमद्-भागवत कथा में अपनी अमृतमयी वाणी से श्रोताओं को आध्यात्मिक आनंद प्रदान कर रहे हैं। कथा समाप्त होने के पश्चात वे सीधे नगर के हृदय स्थल स्थित श्री सप्तदेव मंदिर पहुँचे और भगवान के चरणों में नमन किया।
मंदिर में हुआ आत्मीय स्वागत
श्री मेहता जी के मंदिर आगमन पर भव्य स्वागत की तैयारियाँ की गई थीं। मंदिर के प्रमुख ट्रस्टी अशोक मोदी, संजय मोदी, गौरव मोदी, चौतन्य मोदी, प्रीति मोदी, निकिता मोदी, वरिष्ठ श्रद्धालु भगवती प्रसाद गोयनका एवं मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित नवीन तिवारी ने श्रीफल, पुष्पगुच्छ एवं दुपट्टा ओढ़ाकर उनका अभिनंदन किया।
मोदी निवास पर मिला आशीर्वाद
दर्शन उपरांत वे मोदी निवास भी पहुँचे, जहाँ उन्होंने परिवारजनों व उपस्थित भक्तों से आत्मीय भेंट कर आशीर्वाद प्रदान किया। सभी ने उनके सान्निध्य में आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मक विचारों का अनुभव किया।
भावुक हुए श्रद्धालु, याद आया 2009 का आगमन
इस अवसर पर अशोक मोदी जी ने कहा कि “श्री विजय शंकर मेहता जी जितने श्रेष्ठ कथाकार हैं, उतने ही महान इंसान भी हैं। उनकी वाणी में अध्यात्म के साथ-साथ सरल और संतुलित जीवन का संदेश छिपा होता है। कोरबा नगर के लिए यह सौभाग्य है कि वे यहाँ पधारे और भगवान सप्तदेव के दर्शन किए।”
उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि वर्ष 2009 में भी श्री मेहता जी कोरबा आए थे और तब भी उन्होंने श्री सप्तदेव मंदिर में दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया था।
जीवन जीने की कला सिखाते हैं मेहता जी
श्री विजय शंकर मेहता जी का नाम आज पूरे देश में आध्यात्मिक चेतना और सकारात्मक विचारों के प्रवाह से जुड़ा हुआ है। उनकी कथाओं में केवल धार्मिकता ही नहीं बल्कि आधुनिक जीवन की जटिलताओं का समाधान भी सहज रूप से मिलता है।
वे युवाओं को संस्कारों से जोड़ने, परिवारों में सौहार्द्र बढ़ाने और समाज में आध्यात्मिकता की धारा प्रवाहित करने का सतत् संदेश देते रहे हैं। यही कारण है कि उनके प्रवचन मात्र प्रवचन न होकर जीवन जीने की कला के सूत्र भी बन जाते हैं।

