August 16, 2026

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“भक्त चरण आश्रय से उद्धार निश्चित है” – हित ललित वल्लभ जी महाराज

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भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर गूंजे गजेंद्र मोक्ष, समुद्र मंथन, वामन अवतार और राम-कृष्ण जन्मोत्सव के प्रसंग

जांजगीर-नैला, 27 अगस्त। अग्रसेन भवन प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर वृंदावन धाम के प्रख्यात भागवत प्रवक्ता श्री हित ललित वल्लभ जी महाराज ने भक्ति, समर्पण और आस्था के महत्व पर अमृतवाणी सुनाई।

महाराज जी ने गज और ग्राह प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब हाथी ने मगर से मुक्ति के लिए प्रभु का स्मरण किया तो भगवान तुरंत प्रकट होकर उसकी रक्षा करने आए। उन्होंने भाव विभोर स्वर में कहा— “भक्त चरण आश्रय से उद्धार निश्चित होता है।”

कथा में समुद्र मंथन का रोचक प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि 14 रत्नों की प्राप्ति हुई, जिनमें अमृत कलश भी शामिल था। असुरों द्वारा छीनने पर भगवान मोहिनी स्वरूप में प्रकट हुए और देवताओं को अमृत पान कराकर विजय दिलाई।

वामन अवतार का वर्णन करते हुए महाराज जी ने कहा कि दानी राजा बलि के यज्ञ में भगवान वामन ने तीन पग भूमि मांगी और त्रिलोकी नाप ली। जब तीसरे पग का स्थान न बचा तो राजा बलि ने अपना शीश समर्पित कर दिया। समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें सुतल लोक का राज्य प्रदान किया।

आगे राम जन्म की कथा सुनाते हुए महाराज जी ने कहा कि “राम चरित्र को समझे बिना जीव कृष्ण चरित्र का अधिकारी नहीं हो सकता।” तत्पश्चात कृष्ण जन्मोत्सव का अलौकिक प्रसंग हुआ, जिसमें पूरा पंडाल भक्तिरस से सराबोर हो गया। जैसे ही शंखध्वनि और बधाइयों के गीत “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” गूंजे, श्रोता नृत्य व उल्लास में झूम उठे।

भक्तों के भाव-विभोर माहौल ने कथा स्थल को वृंदावन जैसा दिव्य बना दिया।

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