“मां से बढ़कर कोई नहीं, मां लात खाकर भी कराती है भोजन” – श्रीमद्भागवत कथा में पं. विजय शंकर मेहता


कृष्ण जन्मोत्सव पर आतिशबाज़ी, फूलों की बारिश और झांकी दर्शन से गूंजा जश्न रिसोर्ट
कोरबा। पितृमोक्षार्थ गयाश्राद्धांतर्गत मातनहेलिया परिवार द्वारा जश्न रिसोर्ट कोरबा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन भक्तिरस और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा वाचक पं. विजय शंकर मेहता ने गजेंद्रमोक्ष, समुद्र मंथन, वामन अवतार, श्रीराम और श्रीकृष्ण की बाल सुलभ लीलाओं का ऐसा रसपान कराया कि पूरा पांडाल भक्ति भाव से सराबोर हो उठा।

पंडित मेहता ने मां के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा –
👉 “दुनिया में मां से बढ़कर कोई नहीं है। वही मां है, जो लात खाकर भी बच्चों को भोजन कराती है। मां आहत होती है, तो भगवान घायल होते हैं। इसलिए मां-बाप की सेवा करना सौभाग्य की बात है।”
उन्होंने कृष्ण-यशोदा की लीलाओं का प्रसंग सुनाकर वात्सल्य भाव से भरे उस क्षण का वर्णन किया, जब बालकृष्ण ने स्तनपान करते समय मां को लात मारी और मां फिर भी आनंद से मुस्कुराई। यह दृश्य सुनकर श्रोता भावविभोर हो उठे।

✨ राम और कृष्ण: सनातन धर्म के दो आयाम
कथा वाचक ने कहा कि श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, जो जीवन को आदर्श सिखाते हैं, वहीं श्रीकृष्ण प्रेम और आनंद के स्रोत हैं।
“राम महल से वन तक गए और मर्यादा सिखाई, कृष्ण वन से महल तक गए और प्रेम का संदेश दिया।”
उन्होंने कहा कि जीवन संघर्ष और सफलता का निरंतर समुद्र मंथन है और भगवान आज भी अपने भक्तों की रक्षा करने किसी न किसी रूप में अवश्य आते हैं।
🎉 कृष्ण जन्मोत्सव पर झूमे श्रद्धालु
चौथे दिन कथा में जैसे ही शाम 6 बजकर 20 मिनट पर भगवान कृष्ण का अवतार हुआ, पूरा कथा स्थल “नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा। मंच पर सजाई गई अद्भुत कृष्ण झांकी ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
कथा परिसर के अंदर फूलों की बारिश हुई और बाहर आतिशबाज़ी ने वातावरण को रोशन कर दिया।
नन्हे-मुन्ने बालकृष्ण रूप में सजकर मटकी फोड़ते, मक्खन खाते और बाल-लीलाएं करते नज़र आए।
श्रद्धालु झूम उठे और भक्ति भाव से आरती में शामिल हुए।
📖 कल का प्रहसन
कथा के पाँचवें दिन 28 अगस्त को पं. विजय शंकर मेहता भगवान कृष्ण की बाल लीलाएं, मथुरागमन, कंसवध और कृष्ण विवाह का प्रहसन प्रस्तुत करेंगे।

