February 14, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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घर में श्रीगणेश जी का विराजमान होना: सुख-समृद्धि और विघ्न-विनाश का प्रतीक

त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **/ हिंदू धर्म में भगवान श्रीगणेश को विघ्नहर्ता और सिद्धिदाता माना गया है। घर में गणेश जी की मूर्ति विराजमान करने का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार, गणपति जी का घर में आगमन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सुख-समृद्धि, सौभाग्य, स्वास्थ्य और पारिवारिक एकता का प्रतीक माना जाता है।

विराजमान होने का महत्व

गणेश जी को प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा या उत्सव की शुरुआत उनसे होती है। घर में गणपति की प्रतिमा स्थापित करने से परिवार में शांति, सकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं से मुक्ति प्राप्त होती है।

परिवारजन क्यों करें पूजा

गणपति स्थापना केवल एक व्यक्ति की पूजा नहीं है, बल्कि पूरे परिवार की भागीदारी का प्रतीक है। जब घर के सभी सदस्य एक साथ मिलकर गणपति का पूजन करते हैं तो पारिवारिक एकता, आपसी प्रेम और सहयोग बढ़ता है। माना जाता है कि इससे घर में आर्थिक उन्नति और संतान सुख की प्राप्ति होती है।

पूजा का समय और विधि

पूजा का श्रेष्ठ समय प्रातःकाल और सायंकाल माना जाता है।

सुबह सूर्य उदय के बाद स्नान करके गणेश जी की मूर्ति के सामने दीप जलाकर पूजा करनी चाहिए।

शाम को संध्या वेला (सूर्यास्त के समय) गणपति आरती और भजन करने का विशेष महत्व है।

पूजन सामग्री और चढ़ावे

गणेश पूजन में निम्न सामग्री अति महत्वपूर्ण मानी जाती है:

दूर्वा घास – गणपति को सबसे प्रिय मानी जाती है।

मोदक और लड्डू – गणेश जी का भोग इन्हें अर्पित किए बिना अधूरा है।

लाल फूल, अक्षत, रोली, सिंदूर, नैवेद्य।

फल – विशेषकर केले, नारियल और अनार।

पूजन के दौरान धूप, दीप और कपूर जलाना अनिवार्य है।

फल और विशेष मान्यताएं

गणपति की पूजा से बुद्धि, विवेक, ज्ञान और स्मरण शक्ति की वृद्धि होती है।

व्यापारियों को व्यवसाय में सफलता और विद्यार्थियों को शिक्षा में प्रगति मिलती है।

घर में स्थायी सुख-समृद्धि का वास होता है और संकट टलते हैं।

विशेष मान्यता है कि गणपति स्थापना से पितृदोष और ग्रहदोष का शमन होता है।

पुरी परंपरा का विशेष महत्व

पुरी जिले में गणेश चतुर्थी और स्थापना पर्व अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यहां घर-घर में गणपति विराजमान किए जाते हैं और सामूहिक रूप से भी मूर्तियों की स्थापना की जाती है। दस दिन तक गणपति की आराधना के बाद अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन किया जाता है।

विशेष जानकारी

गणपति स्थापना उत्तर-पूर्व दिशा या ईशान कोण में करनी चाहिए।

मूर्ति मिट्टी की होनी चाहिए, प्लास्टर ऑफ पेरिस की नहीं।

पूजा के दौरान ओं गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करने से दोगुना फल मिलता है।

परिवार में कोई नया कार्य, व्यवसाय की शुरुआत या परीक्षा के पहले गणपति की आराधना करने से सफलता निश्चित होती है।

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