रक्षाबंधन पर मितानिनों ने प्रधानमंत्री को भेजी ‘पाती’, स्थायित्व व मानदेय वृद्धि की मांग, 9 अगस्त को रायपुर में आर-पार की लड़ाई का ऐलान”




त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/ कोरबा। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ की आशा-मितानिनों ने अपने हक और अधिकारों की आवाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाने का अनूठा तरीका अपनाया है। प्रदेश की करीब 75 हजार आशा-मितानिन, मितानिन प्रशिक्षक, हेल्थ फैसिलिटेटर व ब्लॉक समन्वयकों ने प्रधानमंत्री को ‘मितानिन की पाती’ भेजकर वादा निभाने की मांग दोहराई है।
वर्ष 2002-03 से प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में कार्यरत ये कर्मी, स्थाई कर्मचारी का दर्जा, मासिक मानदेय में 50% वृद्धि और NGO आधारित ठेका प्रथा को समाप्त कर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) में नियमित करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2023 में भाजपा के घोषणा पत्र में “मोदी की गारंटी” के तहत यह वादा किया गया था, लेकिन डबल इंजन सरकार बनने के बावजूद अब तक इसे धरातल पर लागू नहीं किया गया है।

मितानिन संघ का आरोप है कि बार-बार ज्ञापन और धरना देने के बावजूद राज्य सरकार ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। 29 जुलाई को रायपुर में हजारों मितानिनों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को ज्ञापन सौंपा था और समाधान के लिए 6 अगस्त तक का समय दिया था, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम न मिलने से अब उन्होंने संभाग स्तरीय धरना-प्रदर्शन का ऐलान किया है।
संभागवार कार्यक्रम के अनुसार –
7 अगस्त: रायपुर संभाग
8 अगस्त: दुर्ग संभाग
9 अगस्त: बिलासपुर संभाग
10 अगस्त: सरगुजा संभाग
11 अगस्त: बस्तर संभाग
कोरबा जिले से 3,090 आशा-मितानिन, 122 मितानिन प्रशिक्षक, 5 हेल्थ डेस्क फैसिलिटेटर और 10 ब्लॉक समन्वयक जुड़े हुए हैं। जिले की मितानिनों ने पंचायत-पंचायत से प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर अपने मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया है।
मितानिन संघ ने साफ किया है कि 9 अगस्त, रक्षाबंधन के दिन रायपुर में होने वाला धरना-प्रदर्शन आर-पार की लड़ाई होगी, जिसमें कोरबा जिला से अधिक से अधिक संख्या में मितानिनों के पहुंचने की अपील की गई है। उनका कहना है कि जब तक स्थायित्व, मानदेय वृद्धि और ठेका प्रथा समाप्त करने की मांग पूरी नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।


