पायलट भी नहीं बचा पाएंगे कांग्रेस का ‘डूबता विमान’ : संतोष पांडेय का तीखा हमला”



छत्तीसगढ़ कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर, ‘डैमेज कंट्रोल’ में जुटे प्रभारी पर भाजपा का बड़ा हमला
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//**// रायपुर। छत्तीसगढ़ की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता एवं सांसद संतोष पांडेय ने प्रदेश कांग्रेस में चल रही आंतरिक खींचतान और गुटबाजी को लेकर तीखा हमला बोलते हुए कांग्रेस पर सीधा निशाना साधा है। उन्होंने कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट के हालिया रायपुर दौरे को ‘डैमेज कंट्रोल की नाकाम कोशिश’ करार देते हुए कहा कि अब कांग्रेस का राजनीतिक “विमान” इतना जर्जर हो चुका है कि कोई भी “पायलट” उसे उड़ा नहीं सकता।
पांडेय ने तीखे व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि छत्तीसगढ़ कांग्रेस में असंतोष की आग अब इतनी भड़क चुकी है कि उसे बुझाने के लिए दिल्ली से विशेष तौर पर सचिन पायलट को भेजना पड़ा है। लेकिन जिस संगठन की नींव ही आपसी अविश्वास और खींचतान पर टिकी हो, वहां कुछ बैठकों से हालात सुधरने वाले नहीं हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने पांच साल के शासनकाल में भ्रष्टाचार और जनविरोधी नीतियों को बढ़ावा दिया, जिसका परिणाम अब पार्टी के भीतर ही विद्रोह के रूप में सामने आ रहा है। पांडेय के मुताबिक, जनता ने तो कांग्रेस को पहले ही नकार दिया था, अब पार्टी के अपने नेता और कार्यकर्ता भी खुलकर विरोध में उतर आए हैं।
प्रदेश में विधायकों की लगातार बैठकों और संगठनात्मक गतिविधियों पर कटाक्ष करते हुए पांडेय ने कहा कि छत्तीसगढ़ कांग्रेस अब कई गुटों में बंट चुकी है। “पायलट यहां एकता का पाठ पढ़ाने आए हैं, लेकिन वे खुद जानते हैं कि कांग्रेस की एकता केवल फोटो तक सीमित रह गई है,” उन्होंने कहा।
भाजपा नेता ने आगे कहा कि कांग्रेस चाहे जितनी भी बंद कमरों में बैठकें कर ले, वह छत्तीसगढ़ की “देवतुल्य जनता” का विश्वास खो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार सुशासन और विकास के नए आयाम स्थापित कर रही है, जिससे घबराकर कांग्रेस अपनी आंतरिक कलह को छिपाने की कोशिश कर रही है।
पांडेय ने अंत में कहा कि कांग्रेस अब मुद्दों से भटक चुकी है और केवल अपनी सियासी जमीन बचाने के लिए आंतरिक संघर्ष को दबाने में जुटी है, लेकिन जनता सब कुछ देख रही है और आने वाले समय में इसका जवाब भी देगी।
निष्कर्ष:
छत्तीसगढ़ में राजनीतिक बयानबाजी अपने चरम पर है। भाजपा जहां कांग्रेस की अंदरूनी स्थिति को मुद्दा बना रही है, वहीं कांग्रेस संगठन को मजबूत करने में जुटी दिखाई दे रही है। ऐसे में आने वाले समय में यह सियासी टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।


