पीएससी तिथियों में बदलाव पर सियासत गरम: युवाओं के दबाव में झुका आयोग, टिकरिहा ने बताया ‘जनदबाव की जीत’



त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ***//**// रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजी पीएससी) द्वारा राज्य सेवा (मुख्य) परीक्षा की तिथियों में अचानक किए गए संशोधन ने प्रदेश की सियासत और युवा वर्ग दोनों में हलचल मचा दी है। पहले 16, 17, 18 और 19 मई को प्रस्तावित परीक्षा को अब बढ़ाकर 6, 7, 8 और 9 जून कर दिया गया है। इस फैसले को भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राहुल टिकरिहा ने सीधे तौर पर “युवाओं के दबाव की जीत” करार दिया है और आयोग पर सवालों के बीच इसे मजबूरी में लिया गया निर्णय बताया है।
टिकरिहा ने तीखे अंदाज़ में कहा कि प्रदेश के हजारों अभ्यर्थी लगातार परीक्षा स्थगन की मांग कर रहे थे, लेकिन जिम्मेदार तंत्र उनकी आवाज़ को नजरअंदाज कर रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि भीषण गर्मी, अव्यवस्थित शेड्यूल और अन्य प्रशासनिक दबावों के बीच युवाओं को परीक्षा देने के लिए मजबूर किया जा रहा था। ऐसे में जब विरोध तेज हुआ, तब जाकर आयोग को अपने फैसले पर पीछे हटना पड़ा।
उन्होंने कहा कि “यह सिर्फ तारीखों का बदलाव नहीं, बल्कि यह साबित करता है कि जब युवा एकजुट होकर आवाज उठाते हैं तो सिस्टम को झुकना पड़ता है।” टिकरिहा ने इसे सरकार और आयोग के लिए एक चेतावनी बताते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
भाजयुमो अध्यक्ष ने यह भी कहा कि परीक्षा की तिथियां आगे बढ़ने से अभ्यर्थियों को लगभग 20 दिनों का अतिरिक्त समय मिला है, जिससे वे अपने विस्तृत पाठ्यक्रम की बेहतर तैयारी कर सकेंगे। लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि सवाल यह है कि यह निर्णय पहले क्यों नहीं लिया गया? क्या युवाओं को सड़कों पर उतरने का इंतजार किया जा रहा था?
टिकरिहा ने प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि बार-बार ऐसी स्थितियां यह दर्शाती हैं कि परीक्षा प्रबंधन में गंभीर खामियां हैं। उन्होंने मांग की कि भविष्य में परीक्षा कैलेंडर तय करते समय अभ्यर्थियों की परिस्थितियों, मौसम और अन्य कारकों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि युवाओं को अनावश्यक तनाव का सामना न करना पड़े।
अंत में उन्होंने कहा कि यह निर्णय भले ही देर से आया हो, लेकिन यह स्पष्ट संदेश देता है कि युवा अब चुप बैठने वाले नहीं हैं। अगर उनके हितों के साथ खिलवाड़ हुआ, तो वे हर स्तर पर अपनी आवाज बुलंद करेंगे।


