एसईसीएल में फिर बीएमएस का परचम, यूनियन सदस्यता में मारी सबसे बड़ी बाजी – एचएमएस को पीछे छोड़ा



त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा– एसईसीएल कोरबा क्षेत्र की सबसे बड़ी कोयला परियोजना गेवरा खदान सहित समूचे कोरबा-पश्चिम क्षेत्र में यूनियन सदस्यता सत्यापन के ताज़ा आंकड़ों में भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने एक बार फिर बाजी मार ली है। बीएमएस अब लगातार दूसरे साल एसईसीएल की नंबर वन यूनियन के रूप में सामने आई है।
गौरतलब है कि 11 जुलाई से 28 जुलाई 2025 तक चले सदस्यता सत्यापन अभियान में सभी प्रमुख यूनियनों ने ज़ोर-शोर से भागीदारी की थी। परंतु जो आंकड़े सामने आए हैं, उनके अनुसार बीएमएस ने 13,342 सदस्यों के साथ पहला स्थान हासिल किया है, जबकि एचएमएस को 12,464 सदस्य मिले हैं, यानी बीएमएस को 878 सदस्य की बढ़त प्राप्त हुई है।
हालांकि अभी अधिकारिक तौर पर प्रबंधन द्वारा अंतिम परिणाम घोषित नहीं किया गया है, लेकिन यूनियन स्तर पर यह साफ हो गया है कि बीएमएस ने सभी क्षेत्रों में एचएमएस को पीछे छोड़कर अपना वर्चस्व फिर से कायम कर लिया है।
🛠️ क्षेत्रवार सदस्यता का हाल
क्षेत्र बीएमएस एचएमएस एटक इंटक
कुसमुंडा 1210 630 956 527
दीपका 585 545 214 259
कोरबा 1330 1134 1659 1712
गेवरा 313 529 438 363
गेवरा यूनिट 88 136 67 97
सीडब्ल्यूएस गेवरा 108 50 43 59
सीडब्ल्यूएस कोरबा 165 120 140 195
सेंट्रल वर्कशॉप कोरबा 27 0 22 19
⚖️ क्या है सिंगल मेंबरशिप की अहमियत?
यूनियन सदस्यता की वैधता के लिए सिंगल मेंबरशिप को अनिवार्य माना गया है। यानी एक कर्मचारी यदि एक से अधिक यूनियनों से जुड़ा पाया जाता है, तो उसकी सदस्यता अमान्य कर दी जाएगी। केवल एक ही यूनियन में पंजीकृत सदस्य को ही मान्यता मिलेगी। इसी आधार पर अंतिम रूप से अधिकारिक घोषणा की जाएगी
📉 एचएमएस का घटता प्रभाव
वर्ष 2024 में भी बीएमएस ने पहला स्थान हासिल किया था, लेकिन उससे पूर्व तक एचएमएस का दबदबा रहा है। लगातार दूसरे वर्ष की बढ़त यह दर्शाती है कि अब एसईसीएल में बीएमएस की जमीनी पकड़ और कार्यकर्ताओं की सक्रियता अधिक प्रभावी होती जा रही है।
📌 प्रबंधन की ओर से घोषणा शीघ्र
2 अगस्त तक सभी यूनियनों को अपने-अपने सदस्यता आंकड़े प्रबंधन के समक्ष प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि थी। अब प्रबंधन द्वारा अधिकारिक घोषणा शीघ्र की जाएगी, जिससे एसईसीएल की सबसे बड़ी यूनियन की स्थिति औपचारिक रूप से स्पष्ट हो जाएगी।
🔊 निष्कर्ष
एसईसीएल में चल रहे यूनियन सदस्यता सत्यापन ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) अपनी पकड़ को लगातार मजबूत कर रहा है। जहां एक ओर बीएमएस की सदस्यता में इजाफा हुआ है, वहीं दूसरी ओर एचएमएस और अन्य यूनियनों को अपने अस्तित्व की पुनः समीक्षा करनी होगी।


