22 जून को मनाई जाएगी योगिनी एकादशी, व्रत से मिलती है मोक्ष और पापों से मुक्ति




त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/ कोरबा। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी, जिसे योगिनी एकादशी कहा जाता है, इस वर्ष 22 जून 2025 (रविवार) को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाएगी। यह तिथि सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाती है।
मान्यता है कि योगिनी एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत शरीर, मन और आत्मा को शुद्ध करने वाला माना गया है।
व्रत तिथि एवं समय
एकादशी तिथि का आरंभ 21 जून 2025 (शनिवार) को प्रातः 07:18 बजे से होगा और इसका समापन 22 जून 2025 (रविवार) को प्रातः 04:47 बजे पर होगा।
हालांकि शास्त्रों के अनुसार दशमी युक्त एकादशी त्याज्य मानी गई है, इसलिए इस वर्ष व्रत 22 जून (रविवार) को रखा जाएगा।
व्रत का पारण 23 जून 2025 (सोमवार) को प्रातः 05:25 बजे से 10:07 बजे तक किया जाएगा।
व्रत का धार्मिक महत्व
योगिनी एकादशी के व्रत से न केवल पुण्य की प्राप्ति होती है, बल्कि शरीर के गंभीर रोग जैसे कोढ़ (कुष्ठ) से भी मुक्ति मिलती है। इस दिन व्रत रखने से 88,000 ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।
व्रत विधि
इस दिन श्रद्धालु प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित कर भगवान विष्णु का गंगाजल से अभिषेक, तुलसी दल, पुष्प और सात्विक भोग अर्पित करें।
इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का जाप करें तथा योगिनी एकादशी की कथा सुनें।
व्रत कथा का सार
पुराणों के अनुसार अलकापुरी में राजा कुबेर के पुष्पवाटिका का माली हेम अपनी पत्नी में आसक्त होकर समय पर फूल न ला सका। राजा कुबेर ने क्रोधित होकर उसे कुष्ठ रोग का श्राप दिया। वर्षों तक दुःख झेलने के बाद हेम माली मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम पहुँचा। ऋषि के मार्गदर्शन में उसने योगिनी एकादशी का व्रत किया जिससे उसका कोढ़ दूर हो गया और उसे मुक्ति मिली।
व्रत पालन के नियम
व्रत की शुरुआत दशमी रात्रि से ही होती है। इस दौरान तामसिक भोजन का त्याग करें, ब्रह्मचर्य का पालन करें और जमीन पर शयन करें। द्वादशी को ब्राह्मण को भोजन कराकर ही पारण करें।
अन्य पूजन अनुशासन
इस दिन पीपल वृक्ष की पूजा, रात्रि जागरण, दान-पुण्य, द्वेष और क्रोध का त्याग, तथा भगवान श्रीहरि विष्णु एवं माता लक्ष्मी की संयुक्त आराधना अत्यंत शुभ मानी जाती है।
नाड़ीवैद्य पंडित डॉ. नागेन्द्र नारायण शर्मा ने बताया कि योगिनी एकादशी न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि मानसिक और शारीरिक शुद्धता के लिए भी अत्यंत लाभकारी है।


