सरगबुंदिया पंचायत में बगावत! 4 दिन से सरपंच के दरवाजे पर डटे ग्रामीण — “खामोशी” बनी सबसे बड़ा सबूत, ISI कसौटी पर घिरा पूरा तंत्र



त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ***//**// 📝 कोरबा/करतला
कोरबा जिले के करतला जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत सरगबुंदिया इन दिनों उबाल, अविश्वास और टकराव का केंद्र बन चुका है। गांव में हालात इतने विस्फोटक हो चुके हैं कि पिछले लगातार चार दिनों से सैकड़ों ग्रामीण सरपंच के घर के बाहर डेरा डाले बैठे हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है — सरपंच आखिर सामने क्यों नहीं आ रहे?
दिन ढलता है, भीड़ जुटती है, रात गहराती है… लेकिन सरपंच के घर के दरवाजे बंद रहते हैं। न कोई संवाद, न कोई स्पष्टीकरण — सिर्फ सन्नाटा और संदिग्ध खामोशी। यही चुप्पी अब पूरे विवाद को और ज्यादा गंभीर बना रही है।
🔥 ISI कसौटी पर पंचायत बेनकाब!
🔎 INFORMATION (सूचना) — “जानकारी गायब या जानबूझकर दबाई गई?”
ग्रामीणों के आरोप बेहद गंभीर हैं और सीधे पंचायत की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करते हैं—
पिछले चार वर्षों में नियमित ग्राम सभा का आयोजन नहीं
बिना प्रस्ताव के योजनाओं को पारित करने के आरोप
बैठक की तिथियों में बार-बार बदलाव
अधिकांश पंचों और ग्रामीणों को सूचना तक नहीं
सीमित लोगों के बीच बैठक कर “कोरम पूरा” दिखाने का खेल
ग्रामीणों का कहना है कि जब वे पंचायत भवन पहुंचते हैं, तो उन्हें यह कहकर लौटा दिया जाता है कि “कोरम पूरा नहीं हुआ”, जबकि अंदर ही अंदर बैठकें पूरी कर ली जाती हैं।

👉 सीधा सवाल:
अगर सब कुछ नियमों के तहत है, तो सूचना खुले तौर पर क्यों नहीं दी जा रही?
क्या लोकतंत्र को कुछ लोगों तक सीमित कर दिया गया है?
⚠️ SECURITY (प्रक्रिया) — “नियमों का पालन या नियमों से खिलवाड़?”
2 मई 2026 की ग्राम सभा बैठक ने पूरे विवाद को विस्फोटक मोड़ दे दिया।
ग्रामीणों के मुताबिक:
सरपंच ने चुनिंदा पंचों के साथ बैठक शुरू कर दी
बाकी पंच जब पहुंचे, तो पंचायत भवन में ताला जड़ दिया गया
सरपंच मौके से निकल गए और बाद में “शासकीय कार्य” का हवाला दिया
👉 अब गांव में गूंज रहे सवाल:
क्या बैठक वास्तव में हुई या सिर्फ दिखावा था?
क्या फैसले पहले से तय थे?
क्या नियमों को सिर्फ कागजों में निभाया जा रहा है?
🚨 INTEGRITY (ईमानदारी) — “खामोशी ही सबसे बड़ा शक!”
चार दिन से लगातार धरना…
हर दिन बढ़ती भीड़…
लेकिन सरपंच पूरी तरह लापता और मौन!
ग्रामीणों का आरोप है:
सरपंच जानबूझकर जवाब देने से बच रहे हैं
सचिव के साथ मिलकर पंचायत को नियंत्रित किया जा रहा है
सच्चाई छिपाने के लिए चुप्पी को हथियार बनाया गया है
👉 सबसे बड़ा सवाल:
अगर सब कुछ सही है, तो सामने आकर जवाब देने में डर क्यों?
⚠️ सचिव की भूमिका भी संदिग्ध
मामले में पंचायत सचिव भी सीधे निशाने पर हैं।
ग्रामीणों के आरोप:
सचिव नियमित रूप से मुख्यालय में उपस्थित नहीं रहते
बैठकों की सूचना समय पर नहीं दी जाती
पिछले एक साल से लगातार बैठकें टाली जा रही हैं
👉 क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर एक सुनियोजित सिस्टम जिसके जरिए पंचायत को नियंत्रित किया जा रहा है?
🚨 धरना बना जनआंदोलन — “अब आर-पार की लड़ाई”
चार दिनों से जारी यह विरोध अब सिर्फ धरना नहीं, बल्कि जनआक्रोश का विस्फोट बन चुका है।
ग्रामीणों की दो टूक चेतावनी:
जब तक सरपंच सामने आकर जवाब नहीं देंगे, आंदोलन जारी रहेगा
पंचायत की अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच हो
सचिव को तत्काल हटाया जाए
ग्राम सभा की बैठकें खुली और पारदर्शी हों
❗ प्रशासन पर बढ़ता दबाव
गांव में बढ़ता तनाव अब प्रशासन के लिए भी गंभीर चेतावनी बन चुका है।
अगर जल्द हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
🧨 सबसे बड़ा सवाल (जो पूरे गांव में गूंज रहा है):
सरपंच आखिर चार दिनों से गायब क्यों हैं?
क्या अनियमितताओं पर पर्दा डाला जा रहा है?
या फिर यह जवाबदेही से बचने की सोची-समझी रणनीति है?
✨ निष्कर्ष (ISI का सीधा संदेश):
सरगबुंदिया पंचायत का यह पूरा घटनाक्रम साफ संकेत देता है कि—
जब सूचना (Information) दबाई जाए,
जब प्रक्रिया (Security) संदिग्ध हो,
और जब ईमानदारी (Integrity) पर सवाल उठें,
👉 तब व्यवस्था खुद ही कटघरे में खड़ी हो जाती है।
जब तक सरपंच सामने आकर सच्चाई नहीं रखते —
यह आंदोलन थमेगा नहीं
यह आक्रोश शांत नहीं होगा
और पंचायत की साख लगातार गिरती जाएगी
📢 सरगबुंदिया आज सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि जवाबदेही की लड़ाई का प्रतीक बन चुका है।


