आषाढ़ मास में बेल न खाएं, सौंफ-हींग का करें सेवन – नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा का सुझाव”




छत्तीसगढ़ के ख्यातिलब्ध आयुर्वेद नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया – ऋतु संधिकाल यानी मौसम परिवर्तन के समय खानपान व दिनचर्या में बदलाव बेहद जरूरी है।
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/ कोरबा। हिंदी पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास का आरंभ 12 जून 2025 गुरुवार से हो चुका है, जो 10 जुलाई 2025 गुरुवार तक रहेगा। इस मौसम को आयुर्वेद में संधिकाल यानी ऋतु परिवर्तन का समय कहा गया है, जब गर्मी समाप्त हो रही होती है और वर्षा ऋतु की शुरुआत होती है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रांत के वरिष्ठ नाड़ी वैद्य व आयुर्वेदाचार्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने विशेष जानकारी देते हुए बताया कि इस मास में खानपान, आहार-विहार और दिनचर्या में सावधानी बरतनी चाहिए।
डॉ. शर्मा ने कहा कि आषाढ़ मास में जलजनित रोगों की संभावना अधिक रहती है। ऐसे में केवल उबला या स्वच्छ जल पीना चाहिए। बेल फल का सेवन इस मास में नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे पाचनतंत्र कमजोर होकर पेट व आंतों में संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है। इसके विपरीत सौंफ और हींग का सेवन पाचन के लिए अत्यंत हितकारी होता है।
उन्होंने कहा कि इस मास में आम, जामुन, तरबूज जैसे रसीले फल और सुपाच्य, हल्के आहार का सेवन करना चाहिए। अनाजों में जौ, ज्वार, मक्का तथा दालों में मूंग, चना, तुअर, मसूर उपयुक्त रहते हैं। सब्जियों में करेला, लौकी, कद्दू, ककड़ी, तरोई, सहजन की फली, चौलाई, पुदीना आदि का प्रयोग लाभदायक होता है। मसालों में जीरा, हल्दी, मेथी, मीठा नीम, दालचीनी, काली मिर्च का उपयोग करना लाभदायक रहता है।
क्या न खाएं:
बेल फल, पपीता
उड़द दाल, कुल्थी, पुराना गेहूं, बाजरा
बैंगन, गोभी, गाजर, मूली
बासी, भारी, तेल-मसाले युक्त या तामसिक भोजन
क्या करें:
प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठें
उबला पानी पीएं
योग, प्राणायाम, व्यायाम करें
ताजा, सुपाच्य भोजन करें
हल्का व संतुलित आहार लें
क्या न करें:
प्रातः देर तक सोना
दिन में सोना या रात में जागरण
तैलीय व मसालेदार भोजन
अत्यधिक भोजन करना
आलस्य, निष्क्रियता व व्यायाम से परहेज
डॉ. शर्मा ने स्कंद पुराण का उल्लेख करते हुए कहा कि आषाढ़ मास में एकभुक्त व्रत यानी एक समय भोजन करना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी बताया गया है। यह पाचन प्रणाली को सुधारता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि आषाढ़ मास की इन आहार नियमों और दिनचर्या का पालन किया जाए तो वर्षा ऋतु में होने वाली बीमारियों से बचा जा सकता है और व्यक्ति वर्षभर स्वस्थ रह सकता है।


