डीएसपीएम संयंत्र में टेंडर घोटाले की गूंज: सिविल इंजीनियर भौरया पर चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने का आरोप, मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश




कोरबा, 13 जून 2025।
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/ कोरबा स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप विद्युत संयंत्र (डीएसपीएम) में कार्यरत सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर (सिविल) एच.एल. भौरया पर मैन्युअल निविदाओं में भारी भ्रष्टाचार और मनचाहे ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुँचाने के आरोप लगे हैं। इस मामले में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को भाजपा सूचना का अधिकार प्रकोष्ठ के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य व विधायक प्रतिनिधि श्री नवनीत राहुल शुक्ला द्वारा एक लिखित शिकायत पत्र सौंपा गया है, जिस पर मुख्यमंत्री ने जांच के निर्देश दे दिए हैं।

ऑनलाइन टेंडरिंग से बचने ‘मैन्युअल घोटाला’ – भौरया पर निजी स्वार्थ के लिए नियमों से खिलवाड़ का आरोप
शुक्ला ने अपने पत्र में बताया कि विद्युत उत्पादन कंपनी में सामान्यतः ऑनलाइन टेंडरिंग प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसमें पारदर्शिता बनी रहती है। लेकिन भ्रष्टाचार की संभावना कम होने के कारण सिविल विभाग के इंजीनियर भौरया द्वारा कार्यों को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटकर 2 लाख तक की मैन्युअल निविदाएँ जारी की जा रही हैं। इन निविदाओं के लिए एक अलग रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया रखी गई है, जिसे केवल भौरया की स्वीकृति से ही पूर्ण किया जाता है।
गेट पास बना भ्रष्टाचार का हथियार, मनचाही शर्तों से प्रभावित हो रहीं निविदाएँ
शिकायत में यह भी कहा गया कि ठेकेदारों को प्लांट परिसर में प्रवेश के लिए पहले भौरया से अनुमति लेनी पड़ती है। यदि वह अनुमति नहीं देते, तो सुरक्षा गार्ड गेट पास जारी नहीं करते, जिससे ठेकेदार चाहकर भी निविदा में भाग नहीं ले सकते। कई बार भौरया स्वयं फोन पर बात करने से भी इनकार कर देते हैं।
श्री शुक्ल ने उदाहरण देते हुए बताया कि हाल ही में अलमारी और फर्नीचर खरीद की निविदा में केवल ‘बी’ श्रेणी के अनुभवी सिविल ठेकेदारों को भाग लेने की अनुमति दी गई, जबकि काम का स्वरूप सिविल से संबंधित नहीं था। इससे स्पष्ट होता है कि किसी विशेष ठेकेदार को लाभ पहुँचाने के लिए मनमानी शर्तें जोड़ी गईं।

प्रतिस्पर्धा खत्म कर, पारदर्शिता से खिलवाड़
श्री शुक्ला ने आरोप लगाया कि निविदाओं की प्रतिस्पर्धा समाप्त कर भौरया चुनिंदा ठेकेदारों को ही मौका दे रहे हैं, जिससे अन्य योग्य व अनुभवी ठेकेदारों के साथ अन्याय हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने दिए सख्त कार्यवाही के संकेत
इस गंभीर मामले पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं और स्पष्ट किया है कि यदि आरोप सही पाए गए, तो दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
श्री शुक्ला ने मैन्युअल निविदाओं के लिए पृथक रजिस्ट्रेशन की बाध्यता समाप्त करने, टेंडर संबंधी जानकारी देने पर प्रवेश देने और भ्रष्टाचार में संलिप्त अधिकारियों पर विभागीय जांच की मांग की है।
निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता बहाली की जरूरत
यह मामला न केवल डीएसपीएम संयंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को सवालों के घेरे में लाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि छोटी निविदाओं के नाम पर किस प्रकार नियमों का दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया जा सकता है। अब देखने वाली बात होगी कि जांच के बाद क्या कार्रवाई होती है और क्या ठेकेदारी प्रणाली में सुधार के प्रयास होते हैं।


