शिक्षा से जुड़कर रोशन किया समाज, अब खुद अंधेरे में: पहाड़ी कोरवा और बिरहोर समाज के 42 शिक्षित युवाओं ने की नौकरी बहाली की मांग




कोरबा, 13 जून 2025।
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/ कोरबा जिले के विशेष पिछड़ी जनजाति—पहाड़ी कोरवा और बिरहोर समाज से ताल्लुक रखने वाले 42 शिक्षित युवाओं ने अपनी आजीविका बचाने और शिक्षा क्षेत्र में अपनी सेवा जारी रखने की अपील करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नाम जिला प्रशासन के माध्यम से ज्ञापन सौंपा।
इन युवाओं ने 2024-25 शैक्षणिक सत्र में जिला खनिज न्यास मद (DMF) के अंतर्गत प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं में अतिथि शिक्षक के रूप में कार्य किया था। उनकी सेवा अवधि 30 अप्रैल 2025 को समाप्त हो चुकी है, जिसके बाद से वे बेरोजगार हो गए हैं और आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
“हमने बच्चों को पढ़ाकर समाज को जोड़ा, अब हमें भी जोड़े रखिए”
ज्ञापन में युवाओं ने भावुक अपील करते हुए कहा है कि शिक्षा के माध्यम से उन्हें रोजगार के साथ सामाजिक सम्मान भी प्राप्त हुआ था। उन्होंने अपने समाज के बच्चों को शिक्षित कर अंधकार से उजाले की ओर ले जाने में योगदान दिया। अब, जब सेवा समाप्त हो चुकी है, तो उनके भविष्य पर अनिश्चितता का संकट मंडरा रहा है।
युवाओं की मांग है कि:
उन्हें पुनः पूर्ववत संस्थाओं में यथावत पदस्थ किया जाए।
उनकी सेवाओं का नियमितीकरण कर स्थायित्व प्रदान किया जाए।
सिर्फ रोजगार नहीं, शिक्षा जागरूकता की मशाल हैं ये युवा
इन शिक्षित युवाओं का कहना है कि यदि उन्हें पुनः अवसर दिया जाए, तो वे अपने समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य और भी प्रभावी ढंग से कर सकते हैं। यह कदम न केवल रोजगार सृजन की दिशा में अहम होगा, बल्कि आदिवासी अंचलों में शिक्षा स्तर सुधारने का भी माध्यम बन सकता है।
समाज के प्रबुद्धजनों ने भी किया समर्थन
इस मांग को समाज के वरिष्ठ जनों और प्रबुद्ध वर्ग ने भी अपना समर्थन देते हुए शासन से अपील की है कि इन युवाओं को स्थायित्व देकर शिक्षा के क्षेत्र में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि यह कदम सरकार की आदिवासी हितैषी नीति को मजबूत करेगा और शिक्षा के माध्यम से सामाजिक बदलाव लाने वाले इन युवाओं को प्रोत्साहन प्रदान करेगा।
सरकार से आग्रह: संवेदनशीलता दिखाते हुए हो सकारात्मक निर्णय
ज्ञापन सौंपने वाले युवाओं और समाज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से अनुरोध किया है कि वे इस मुद्दे पर संवेदनशीलता और दूरदृष्टि के साथ निर्णय लें, ताकि इन युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो और वे शिक्षा की अलख जलाते रहें।


