ऑपरेशन से बचाया आयुर्वेद ने – साइटिका पीड़ित युवक को दो महीने में मिला नया जीवन




त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा *****/ गंभीर बीमारियों के इलाज में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति एक बार फिर कारगर साबित हुई है। रूमगरा बाल्को निवासी सुरेश कुमार साहू नामक युवक, जो लंबे समय से गृध्रसी (साइटिका) जैसे कष्टदायक रोग से पीड़ित थे और जिन्हें डॉक्टरों ने ऑपरेशन की अंतिम सलाह दी थी, आज पूर्णतः स्वस्थ हैं – और यह संभव हुआ केवल आयुर्वेद, परहेज और अनुशासन के बल पर।
सुरेश कुमार साहू को साइटिका के चलते इतना असहनीय दर्द होता था कि उनका चलना, उठना-बैठना भी मुश्किल हो गया था। विभिन्न डॉक्टरों से परामर्श लेने के बाद अंततः उन्हें सर्जरी की सलाह दी गई, जिससे वे मानसिक रूप से बेहद व्यथित हो गए। ऑपरेशन से बचने के लिए उन्होंने वैकल्पिक चिकित्सा का रुख किया और निहारिका स्थित ‘श्री शिव औषधालय’ पहुंचे, जहां प्रसिद्ध नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने उनकी त्रिविध परीक्षा कर नाड़ी परीक्षण के आधार पर उनका उपचार आरंभ किया।
डॉ. शर्मा ने उन्हें विशेष आयुर्वेदिक औषधियां, खान-पान संबंधी परहेज तथा दैनिक जीवनचर्या में जरूरी सुधारों की सलाह दी। सुरेश कुमार ने पूरी निष्ठा और अनुशासन के साथ इस उपचार पद्धति का पालन किया, और परिणामस्वरूप, मात्र दो माह में वे पूर्णतः स्वस्थ हो गए। अब वे न केवल सामान्य रूप से चल-फिर पा रहे हैं, बल्कि दौड़ने जैसे कार्य भी आराम से कर रहे हैं।
इस अनुभव को सुरेश कुमार एक “आयुर्वेदिक चमत्कार” मानते हैं। उन्होंने कहा कि जब आधुनिक चिकित्सा ने ऑपरेशन को अंतिम विकल्प बताया, तब आयुर्वेद ने बिना चीरफाड़ के उन्हें नया जीवन दिया। उन्होंने सभी लोगों से अपील की है कि वे गंभीर बीमारियों की स्थिति में भी आयुर्वेद को प्राथमिकता दें और समय रहते इस पद्धति का लाभ उठाएं।
नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने कहा, “यह कोई चमत्कार नहीं, बल्कि प्राचीन ऋषि परंपरा द्वारा प्रदत्त आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान की शक्ति है। आयुर्वेद शाश्वत, विशुद्ध और निरापद चिकित्सा पद्धति है, जो केवल शरीर को नहीं बल्कि मन और आत्मा को भी संतुलन प्रदान करती है।”
उन्होंने कहा कि यदि रोगी नियम, अनुशासन और संयम के साथ आयुर्वेद को अपनाए, तो गंभीर से गंभीर रोग भी साध्य हो सकते हैं। यह केस आयुर्वेद के प्रभावशाली और परिणामदायी स्वरूप का जीवंत प्रमाण है।
आज जब आधुनिक जीवनशैली के कारण गृध्रसी (साइटिका) जैसी बीमारियां आम होती जा रही हैं, तब आयुर्वेद एक नई आशा बनकर उभर रहा है। इस प्रकार की सफलताएं यह सिद्ध करती हैं कि भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति आज भी उतनी ही प्रभावशाली और प्रासंगिक है, जितनी प्राचीन काल में थी।


