संभावनाओं पर जंग खा रही मशीनें: मोतीसागर शवदाह गृह बना उपेक्षा का शिकार




त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/ कोरबा। नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा 2020 में मोतीसागर पारा स्थित मुक्तिधाम में पर्यावरण के अनुकूल गैस चलित शवदाह गृह की स्थापना की गई थी, लेकिन लाखों रुपए की लागत से बनी यह सुविधा आज उपयोग से पहले ही निष्क्रिय हो चुकी है। नगर निगम के सभापति नूतनसिंह ठाकुर ने हाल ही में इसका निरीक्षण किया और स्थिति को देखकर कड़ी नाराजगी जताई।
निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि शवदाह गृह में उपयोग की जाने वाली मशीनें जर्जर हो चुकी हैं और उनके रखरखाव में भारी लापरवाही बरती गई है। नूतनसिंह ठाकुर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि रायपुर की जिस फर्म को मशीनों की स्थापना और तीन वर्षों तक उनके रखरखाव की जिम्मेदारी दी गई थी, उस पर तत्काल कार्रवाई की जाए और मशीनों को शीघ्र चालू किया जाए।
मुक्तिधाम परिसर की साफ-सफाई, सौंदर्यीकरण और उद्यान विकास के लिए भी अधिकारियों को निर्देश दिए गए। निरीक्षण के समय वार्ड की पार्षद श्रीमती रूबी सागर, टामेश अग्रवाल, बादल सिंह, दिवाकर सिंह सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद थे।
उद्देश्य हुआ विफल, मशीनें बन गईं कबाड़
गौरतलब है कि पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए शासन ने बड़े शहरों में पारंपरिक लकड़ी जलाकर होने वाले अंतिम संस्कार के स्थान पर इलेक्ट्रॉनिक व गैस चलित शवदाह गृह की सुविधा शुरू की थी। इसी दिशा में कोरबा के मोतीसागर मुक्तिधाम में लगभग 50 लाख रुपए की लागत से 2020 में यह सुविधा शुरू की गई थी। रायपुर की एक फर्म ने मशीनों की स्थापना पूरी की, लेकिन मशीनों के चालू होने के बाद से अब तक एक भी शव का अंतिम संस्कार यहां नहीं हो सका।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, मशीनों का संचालन करने में फर्म की रुचि नहीं रही, और नगर निगम ने भी समुचित निगरानी नहीं की। परिणामस्वरूप, मशीनें धीरे-धीरे निष्क्रिय होती गईं और अब कबाड़ का रूप ले चुकी हैं। यहां तक कि इलेक्ट्रिक केबल तक चोरी हो चुके हैं।
सभापति ने जताई नाराजगी, दिए कार्रवाई के निर्देश
सभापति नूतनसिंह ठाकुर ने इस गंभीर लापरवाही को जनता के साथ धोखा बताते हुए निगम आयुक्त को संबंधित फर्म व ठेकेदार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जब महानगरों में आम जनता गैस चलित शवदाह गृह की सुविधा का लाभ ले रही है, तो कोरबा जैसे शहर में यह सुविधा उपेक्षा का शिकार क्यों है?
जनहित में आवश्यक है पुनरुद्धार
नगर निगम की निष्क्रियता और निगरानी के अभाव में लाखों रुपए की सार्वजनिक धनराशि व्यर्थ जा रही है। गैस चलित शवदाह गृह न केवल पर्यावरण के लिए हितकारी है, बल्कि आम जनता के लिए एक सुविधाजनक विकल्प भी है। यदि इस योजना को शीघ्र पुनर्जीवित नहीं किया गया, तो यह एक बड़ी प्रशासनिक विफलता मानी जाएगी।


