नारीशक्ति का 108-गुना जयघोष: श्री हित सहचरी सेवा समिति ने गूंजाया हनुमान चालीसा का अभूतपूर्व पाठ




त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/ श्री हित सहचरी सेवा समिति द्वारा हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर आयोजित 108 बार हनुमान चालीसा पाठ ने आस्था, भक्ति और सामूहिक एकता का एक अद्वितीय उदाहरण पेश किया। समारोह की शुरुआत सुबह साढ़े छह बजे हुई, जब समिति की लाख-जागृति से प्रेरित नारीशक्ति ने मिलकर श्री हनुमानजी को समर्पित सुरों में पहला चौपाई उच्चारित किया।
भव्य आयोजन का स्वरूप
समिति के हाल भव्य पात्रों और पारंपरिक रंगों से सजाए गए थे, जहाँ एक ओर मेहँदी व गुग्गल की खुशबू व्याप्त थी, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक ढोल-नगाड़ों की थाप पर भक्तों का मन आनंदित हो उठा। इंटरनेट व सोशल मीडिया के माध्यम से भी इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया गया, जिससे देश-विदेश में फैली श्रद्धालुओं ने भी उत्साहपूर्वक इसमें भागीदारी दर्ज कराई।
नारीशक्ति की भूमिका
इस आयोजन की सबसे प्रमुख विशेषता रही महिलाओं की संगठित भागीदारी। समिति की प्रमुख सदस्य नीरू राय, मंजूलता गुप्ता, श्वेता राय, मीनाक्षी शर्मा, राजश्री पांडे से लेकर तुलसी सहित कुल 35 सक्रिय महिला सदस्यों ने 108 बार पाठ के प्रत्येक चरण को आवाज दी। उनके स्वरबद्ध सुमिरनों ने न केवल माहौल को अध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत कर दिया, बल्कि समाज में महिलाओं के संगठनात्मक कौशल को भी उजागर किया।
“जब हम सभी मिलकर हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे हर दोहे के साथ हमारी आत्माएँ प्रभु हनुमानजी के और भी निकट आ रही हैं।”
— , नीरू राय
सामूहिक भक्ति और सेवा का संगम
चालीसा के पाठ के साथ ही सदस्यों ने प्रसाद वितरण, स्वच्छता अभियान और वृद्धाश्रम में फल-भोजन पहुँचाने जैसी सेवा गतिविधियाँ भी अमल में लाईं। प्रभु हनुमान की सेवा और भक्ति को एक सूत्र में पिरोते हुए, समिति ने यह संदेश दिया कि सच्ची श्रद्धा केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कर्मों में भी प्रकट होती है।
आयोजन का उद्देश्य और प्रभाव
समिति के महासचिव नीरू राय के अनुसार, इस आयोजन का प्रथम उद्देश्य भक्ति-भाव को जागृत करना था, जबकि द्वितीय उद्देश्य सामाजिक समरसता और एकता का संदेश देना था। उन्होंने बताया कि 108 एक पवित्र संख्या मानी जाती है, और इतनी बार पाठ करने से मानसिक शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का अनवरत संचार होता है।
आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा
इस कार्यक्रम ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि नारीशक्ति न केवल पारिवारिक ढांचे की रीढ़ है, बल्कि समाज की आध्यात्मिक उन्नति का मार्गदर्शक भी हो सकती है। समिति ने वादा किया कि भविष्य में इस तरह के और भी समर्पित आयोजन करके सामाजिक सौहार्द्र और सेवा भाव को और अधिक व्यापक किया जाएगा।
समापन में, समिति ने सभी भक्तों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और स्वयं सेवकों का हृदय से आभार व्यक्त किया। इस 108-गुना चालीसा पाठ ने कोरबा की धरती पर नारीशक्ति की सामूहिक भक्ति को अमर कर दिया और वर्ष भर के लिए समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया।




