March 16, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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चेक बाउंस मामले में कड़ा फैसला — 6 माह की जेल, 2.58 लाख रुपये प्रतिकर देने का आदेश

 

त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//** कोरबा न्यायालय का महत्वपूर्ण निर्णय, बैंक से लिए लोन की देनदारी नहीं चुकाने पर आरोपी दोषी करार
कोरबा। चेक बाउंस के एक महत्वपूर्ण मामले में कोरबा न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी को दोषी ठहराया है। माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्रीमती सोनी तिवारी की अदालत ने परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के अंतर्गत सुनवाई करते हुए अभियुक्त को 6 माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है तथा परिवादी को 2 लाख 58 हजार रुपये प्रतिकर राशि अदा करने का आदेश दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रकरण क्रमांक 2116/2022 (इंडियन बैंक विरुद्ध सुखमति साहू) में यह मामला सामने आया था। प्रकरण के अनुसार अभियुक्त ने बैंक से प्राप्त एमएसएमई टर्म लोन की देनदारी के निर्वहन के लिए 2 लाख रुपये का चेक जारी किया था। जब बैंक द्वारा उक्त चेक को प्रस्तुत किया गया तो खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण चेक अनादरित (बाउंस) हो गया।
बैंक की ओर से नियमानुसार अभियुक्त को विधिक नोटिस भी भेजा गया, किंतु नोटिस प्राप्त होने के बाद भी अभियुक्त द्वारा निर्धारित समयावधि में राशि का भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद मामला न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां दोनों पक्षों की दलीलों और प्रस्तुत दस्तावेजी साक्ष्यों पर विस्तृत सुनवाई की गई।
सभी तथ्यों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के पश्चात न्यायालय ने अभियुक्त सुखमति साहू को दोषी पाते हुए 6 माह के साधारण कारावास से दंडित किया। साथ ही न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि अभियुक्त एक माह के भीतर परिवादी को 2,58,000 रुपये प्रतिकर राशि का भुगतान करे। यदि निर्धारित अवधि में प्रतिकर राशि अदा नहीं की जाती है, तो अभियुक्त को एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भी भुगतना होगा।
न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अभियुक्त का जमानत मुचलका निरस्त करते हुए उसे अभिरक्षा में लेने का आदेश भी पारित किया।
इस प्रकरण में परिवादी की ओर से प्रभावी पैरवी अधिवक्ता धनेश कुमार सिंह द्वारा की गई। उन्होंने न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय चेक अनादरण जैसे आर्थिक अपराधों पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे फैसलों से बैंकिंग प्रणाली में लोगों का विश्वास और मजबूत होता है तथा यह संदेश भी जाता है कि आर्थिक लेन-देन में जिम्मेदारी और समय पर भुगतान अत्यंत आवश्यक है।

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