May 4, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

खबरें जरा हट के

सरगबुंदिया पंचायत में विस्फोटक हालात: 4 दिन से सरपंच के घर के बाहर डटे ग्रामीण, “खामोशी” पर उठे बड़े सवाल — ISI कसौटी पर घिरा पूरा तंत्र

 

📝
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//**//  कोरबा जिले के करतला जनपद अंतर्गत आने वाला ग्राम पंचायत सरगबुंदिया इन दिनों भारी उबाल और टकराव की स्थिति में है। गांव के दर्जनों नहीं बल्कि बड़ी संख्या में ग्रामीण पिछले लगातार चार दिनों से सरपंच के घर के बाहर धरने पर बैठे हुए हैं, लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अब तक सरपंच न तो सामने आए हैं, न कोई बयान दिया है और न ही किसी प्रकार की सफाई दी है।
हर शाम ग्रामीण इकट्ठा होते हैं, देर रात तक इंतजार करते हैं—लेकिन दरवाजे बंद, संवाद बंद और जवाब पूरी तरह से गायब। यही चुप्पी अब पूरे मामले को और अधिक गंभीर और संदिग्ध बना रही है।
इस पूरे घटनाक्रम को अगर ISI (Information, Security, Integrity) के पैमाने पर देखा जाए, तो पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
🔥 INFORMATION (सूचना) पर सवाल — “जानकारी छिपी या दबाई जा रही?”
ग्रामीणों का सबसे बड़ा आरोप है कि पिछले चार वर्षों में ग्राम सभा की नियमित बैठक ही नहीं कराई गई।
बिना ग्राम सभा के प्रस्ताव पारित किए जाने के आरोप
बैठक की तिथि बार-बार बदलने की शिकायत
अधिकांश पंचों और ग्रामीणों को सूचना ही नहीं दी जाती
सीमित लोगों के बीच बैठक कर “कोरम पूरा” दिखाया जाता
जब ग्रामीण पंचायत भवन पहुंचते हैं तो उन्हें बताया जाता है कि “कोरम पूरा नहीं हुआ”, और बैठक स्थगित कर दी जाती है।
👉 सवाल उठता है:
अगर सब कुछ नियमों के अनुसार हो रहा है, तो सूचना पारदर्शी तरीके से क्यों नहीं दी जा रही?
क्या जानबूझकर आम ग्रामीणों को प्रक्रिया से बाहर रखा जा रहा है?
🔥 SECURITY (प्रक्रिया की सुरक्षा) पर सवाल — “नियमों का पालन या नियमों का खेल?”
2 मई 2026 को आयोजित ग्राम सभा बैठक ने पूरे विवाद को विस्फोटक बना दिया।
ग्रामीणों के अनुसार:
सरपंच ने कुछ चुनिंदा पंचों के साथ बैठक शुरू कर दी
बाकी पंच जब तक पहुंचे, पंचायत भवन में ताला लगा दिया गया
सरपंच मौके से चले गए और बाद में “शासकीय कार्य में व्यस्त” होने का हवाला दिया
यह घटना सिर्फ एक विवाद नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सीधा सवाल खड़ा करती है।
👉 क्या बैठक वास्तव में हुई?
👉 क्या निर्णय पहले से तय थे?
👉 क्या नियमों को सिर्फ दिखावे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है?
🔥 INTEGRITY (ईमानदारी) पर सवाल — “मौन क्यों? जवाब से बचाव क्यों?”
चार दिनों से लगातार धरना…
हर दिन बढ़ती भीड़…
लेकिन सरपंच पूरी तरह से गायब और खामोश!
ग्रामीणों का आरोप है कि:
सरपंच जानबूझकर संवाद से बच रहे हैं
सचिव के साथ मिलकर पंचायत का कामकाज प्रभावित किया जा रहा है
जवाब देने के बजाय चुप्पी को हथियार बनाया जा रहा है
👉 सबसे बड़ा सवाल:
अगर सब कुछ सही है, तो सामने आकर जवाब देने में डर किस बात का?
⚠️ सचिव भी घेरे में — “मुख्यालय से गायब, व्यवस्था ठप”
ग्राम पंचायत के सचिव की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
ग्रामीणों का आरोप है:
सचिव नियमित रूप से मुख्यालय में उपस्थित नहीं रहते
बैठकों की सूचना समय पर नहीं दी जाती
पिछले एक साल से बैठकों को टालने की प्रवृत्ति
👉 क्या यह केवल लापरवाही है या फिर सुनियोजित तरीके से व्यवस्था को नियंत्रित करने का प्रयास?
🚨 धरना बना जनआंदोलन — “अब नहीं रुकेगा विरोध”
चार दिनों से जारी धरना अब सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि जनआक्रोश में बदल चुका है।
ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि:
जब तक सरपंच सामने आकर जवाब नहीं देते, धरना जारी रहेगा
पंचायत में हो रही अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए
सचिव को तत्काल हटाया जाए
ग्राम सभा की बैठकें खुले और पारदर्शी तरीके से कराई जाएं
❗ प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
गांव में बढ़ता तनाव अब प्रशासन के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।
यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
🧨 बड़ा सवाल, जो पूरे गांव में गूंज रहा है:
सरपंच चार दिनों से सामने क्यों नहीं आए?
क्या अनियमितताओं पर पर्दा डाला जा रहा है?
या फिर यह जवाबदेही से बचने की रणनीति है?
✨ (ISI का सीधा संदेश):
सरगबुंदिया पंचायत का यह मामला साफ दिखाता है कि जब सूचना (Information) छिपाई जाए, प्रक्रिया (Security) संदिग्ध हो और ईमानदारी (Integrity) पर सवाल उठे, तो व्यवस्था खुद-ब-खुद कठघरे में आ जाती है।
जब तक सरपंच खुद सामने आकर स्थिति स्पष्ट नहीं करते,
👉 यह धरना खत्म नहीं होगा,
👉 यह आक्रोश और भड़केगा,
👉 और पंचायत की साख पर लगा सवाल और गहराता जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.