बालोद: जंगल में दफन था बड़ा राज! भालू के पंजे गायब, तस्करी का शक गहराया


त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/ बालोद, छत्तीसगढ़। बालोद जिले के किल्लोबाहरा जंगल में एक नर भालू की रहस्यमयी मौत ने वन विभाग और वन्यजीव संरक्षण तंत्र पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 24 फरवरी को मिले भालू के शव को गुपचुप तरीके से बिना पोस्टमॉर्टम दफना दिया गया, लेकिन जब 27 दिन बाद उसे दोबारा निकाला गया, तो जो सामने आया, उसने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया।
भालू के शव से गायब थे पंजे, रस्सी से बंधा मिला शरीर
जब वन विभाग और पशु चिकित्सा विभाग की संयुक्त टीम ने 27 दिन बाद शव को बाहर निकाला, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए—
✅ 1 फीट खुदाई में भालू के पंजे मिले, जबकि 3 फीट नीचे रस्सी से बंधा सड़ा-गला शव पड़ा था।
✅ भालू के पंजे अलग क्यों थे?
✅ क्या उन्हें काटकर बाद में गड्ढे में गाड़ दिया गया?
✅ क्या यह वन विभाग और वन्यजीव तस्करों की मिलीभगत का मामला है?
भालू के अंगों की तस्करी का बड़ा खेल?
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, नर भालू के पंजे, दांत, नाखून और गुप्तांग की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी कीमत होती है। इनका उपयोग अवैध दवाइयों, तंत्र-मंत्र और वन्यजीव व्यापार में किया जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भालू के कीमती अंग तस्करों को बेचे गए और सबूत छुपाने के लिए जल्दबाजी में शव को दफना दिया गया?
वन विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि बालोद वन विभाग ने इस घटना को उच्च अधिकारियों से छिपाया क्यों?
🚨 पोस्टमॉर्टम न कराना क्या अपराध को छुपाने की साजिश थी?
🚨 डौंडीलोहारा वन परिक्षेत्र अधिकारी केके साहू और वन मंडलाधिकारी बलभद्र सरोटे क्यों चुप हैं?
🚨 मामला तूल पकड़ने पर अधिकारी मीडिया से बचते दिख रहे हैं।
फॉरेंसिक जांच में खुलासा, लेकिन एक महीने की देरी क्यों?
भालू के पंजों, त्वचा और आंतरिक अंगों के नमूने दिल्ली और हैदराबाद की नेशनल फॉरेंसिक लैब भेजे गए हैं, लेकिन रिपोर्ट आने में एक महीना लगेगा। क्या यह तस्करों और भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने की साजिश का हिस्सा है?
हाई-लेवल जांच की मांग, एनजीटी तक पहुंचेगा मामला
अब इस मामले को कई वन्यजीव संरक्षण संस्थाएं राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) तक ले जाने की तैयारी कर रही हैं। उधर, वन विभाग ने भी हाई-लेवल जांच के संकेत दिए हैं, लेकिन जनता को अब परिणाम और जवाब चाहिए।
जनता की मांग – लापरवाही या साजिश, सच्चाई सामने आए!
🌍 अगर यह लापरवाही थी, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
🌍 अगर यह संगठित तस्करी का मामला है, तो दोषियों का पर्दाफाश किया जाए।
क्या यह छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े वन्यजीव तस्करी घोटाले का खुलासा करेगा? या वन विभाग के भ्रष्ट अधिकारी बच निकलेंगे? – यह सवाल अब हर वन्यजीव प्रेमी और प्रदेश की जनता के मन में गूंज रहा है!


