आज सेअगहन मास में महालक्ष्मी की पूजा में 16 के आंकड़े का होता है विशेष महत्व, जानिए पूजा की संपूर्ण विधि


महालक्ष्मी की पूजा में 16 के आंकड़े को विशेष महत्व दिया जाता है। महिलाएं सुबह 16 बार मुंह धोने की रस्म निभाएंगी।

अगहन मास में महालक्ष्मी की पूजा में 16 के आंकड़े का होता है विशेष महत्व, जानिए पूजा की संपूर्ण विधि
आज महालक्ष्मी की पूजा कर मांगेंगी सुख-समृद्धि
महालक्ष्मी की पूजा में 16 के आंकड़े का विशेष महत्व
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ***/ हिंदू संवत्सर के मार्गशीर्ष यानी अगहन मास के गुरुवार को महालक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना का विधान है। अगहन मास के अंतिम गुरुवार को घर-घर में महालक्ष्मी की पूजा करके सुख, समृद्धि की कामना की जाएगी। अगहन गुरुवार की पूर्व संध्या पर महिलाओं ने अपने घर-आंगन की साफ सफाई करके सुंदर रंगोली सजाई और द्वार से लेकर पूजा घर तक माता लक्ष्मी के पद चिन्ह अंकित कर महालक्ष्मी को आमंत्रित किया। महामाया मंदिर प्रांगण में भी महालक्ष्मी के स्वागत में आकर्षक रंगोली बनाई गई। मंदिर परिसर में गुरुवार को महिलाएं पूजा-अर्चना करेंगी।

पूजा में 16 के आंकड़े का महत्व
मंदिर के पुजारी पं. कृष्णl द्विवेदी ने बताया कि महालक्ष्मी की पूजा में 16 के आंकड़े को विशेष महत्व दिया जाता है। महिलाएं सुबह 16 बार मुंह धोने की रस्म निभाएंगी। धागे में 16 गांठें लगाकर पूजा थाल में रखकर हल्दी में डुबोएंगी। 16 पत्तल में भोग अर्पित करेंगी। पौराणिक मान्यता के अनुसार मार्गशीर्ष मास में मां लक्ष्मी बैकुंठधाम से पृथ्वीलोक विचरण करने पधारतीं हैं। ऐसे घर का आतिथ्य स्वीकार करती हैं, जहां पूरे घर की साफ सफाई, ईमानदारी, सच्चाई और आध्यात्मिकता का माहौल हो।

ऐसे करें पूजा
– घर में नए चावल के आटे का घोल बनाकर घर के द्वार से लेकर सभी कमरों पूजा स्थल तक मां लक्ष्मी के पद चिन्ह बनाएं।


– गुरुवार की भोर में स्नान कर स्वच्छ पीले वस्त्र पहन कर घर के दरवाजे खोलकर मां लक्ष्मी के आगमन की कामना से पूजा करें।

