February 11, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

खबरें जरा हट के

मिट्टी की ढेर में दबे दो युवकों का शव बरामद, तीसरा धायल अवस्था मे बाहर निकाला गया..कुल तीन युवकों की मौत..दो घायल:

Trinetra times Korba  एसईसीएल दीपका बंद पड़ी खदान हादसे में कोयला निकालने गये समीप के गांव के 5 युवकों में से 3 की मौत हो गई।जबकि 2 गंभीर रूप से घायल है जिनका इलाज चल रहा हैं। ये सभी ओबी की मिट्टी धसकने के फलस्वरूप मिट्टी के नीचे गुरुवार को दब गए थे।दो युवक की मौत घटना स्थल पर हो गई जबकि तीसरे ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया ।

बता दे कि हादसे की जानकारी लगते ही पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया.संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन राज्य आपदा प्रबंधन टीम के साथ शुरू किया गया। स्थानीय लोगों ने भी इसमें मदद की ।
कलेक्टर अजीत वसंत और पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी एवं एसईसीएल के अधिकारियों की मौजूदगी में देर रात तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलता रहा और अंततः आज सुबह 5-6 बजे के मध्य 18 वर्षीय प्रदीप पोर्ते पिता परदेशी ग्राम बम्हनीकोना और 24 वर्षीय शत्रुघ्न कश्यप पिता चमरु कश्यप की लाश को बाहर निकाल लिया गया। वहीं तीसरा लापता ग्रामीण 17 वर्षीय लक्ष्मण पोर्ते 60 फीट नीचे गड्ढे में गिरा मिला। रेस्क्यू टीम को घायल लक्ष्मण का हाथ दिखा और फिर उसे खदान से बाहर निकाल कर विभागीय अस्पताल नेहरू शताब्दी चिकित्सालय भिजवाया गया। वहां से गहन चिकित्सा के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया।

इस घटना को लेकर कल दोपहर से ही ग्रामीणों में गहमा गहमी का माहौल रहा। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामवासी मौजूद रहे। यहां सुरक्षा के लिए जवान भी तैनात किए गए थे। शव बरामद होने के बाद जहां परिजनों में कोहराम मच गया वहीं गांव वासियों के द्वारा पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की मांग की जाने लगी। ग्रामीणों को मौके से हटाने के लिए प्रयास के दौरान पुलिस के साथ झूमा झटकी भी हुई। इसमें कुछ लोग चोटिल भी हुए हैं।

पिछले दो साल से दीपका खदान का केंवटा डबरी और सुआभोड़ी क्षेत्र के बंद खदान में हुई दुखद घटना की भेंट तीन किशोर चढ़ गए। गंभीर बात यह है कि जब से इस क्षेत्र में प्रबंधन ने उत्खनन बंद किया है, तब से आसपास में रहने वाले ग्रामीण यहां से कोयला निकाल रहे हैं।
सवाल यह उठता है कि आखिर खदान में तैनात किए गए सुरक्षा बल के जवान इतने दिनों से क्या कर रहे थे। उनकी नजर इस स्थल पर होने वाले कोयला चोरी पर नहीं पड़ी या फिर नजर अंदाज कर दिया गया।

साऊथ ईस्टर्न कोलफिल़्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की दीपका खदान में कोयला चोरी के दौरान मिट्टी धसकने की हुई घटना से प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीण सदमें में है। पढ़ने लिखने की उम्र जिन बच्चों की थी, वे अभावग्रस्त परिवार होने की वजह से कोयला चोरी में लिप्त हो गए।

डिंडोलभाठा में रहने वाले पांच किशोर अमित, लक्ष्मण मरकाम, शत्रुघन कश्यप, प्रदीप कुमार कमरो और लक्ष्मण ओढ़े (सभी की उम्र 16 से 19 वर्ष) कोयला चोरी करने घुसे थे। लंबे समय से यहां कोयला चोरी की जा रही थी, इसलिए लगातार मिट्टी हटाए जाने की वजह से गहरा सुरंग बन गया था। इसके बाद भी प्रबंधन इस ओर ध्यान नहीं गया और आखिर वहीं हुआ, जिसकी आशंका थी। गुरूवार को सुरंग के अंदर से कोयला निकालने के दौरान अचानक मिट्टी धसक गई और तीन शत्रुघन कश्यप, प्रदीप कुमार कमरो और लक्ष्मण ओढ़े मलबे में दब गए। वहीं अमित सरूता बाल- बाल बच गया। मलबे में दबे अपने एक साथी लक्ष्मण मरकाम को किसी तरह मलबे से बाहर निकाल लिया, पर उसकी कमर की हड्डी टूट गई। इसलिए वह बैठ नहीं पा रहा था। दर्द से बिलख रहे लक्ष्मण को मौके पर पहुंचे एसईसीएल कर्मियों ने अस्पताल भेजा। जंगल में लगी आग की तरह घटना की सूचना क्षेत्र में फैल गई और लोग मौके पर पहुंचने लगे। सूचना मिलने पर दीपका पुलिस की टीम भी घटनास्थल पहुंच गई। नजदीक में ही तीनों दबे किशोरों साइकिल भी पड़ी मिली है, जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया ह

एसईसीएल की सुरक्षा में टीएसआर समेत दो बटालियन के जवान लगे हुए हैं। इसके अलावा निजी सुरक्षा कर्मियों का भी अमला खदान में तैनात है। खदान क्षेत्र में लगातार पेट्रोलिंग किए जाने के दावे पर इस घटना के बाद सवाल उठना लाजिमी है। लंबे समय से यदि बंद खदान से थोड़े से फायदे के लिए ग्रामीण जान जोखिम में डाल कर कोयला निकाल रहे थे और उन्हें रोकने की जहमत किसी ने नहीं उठाई।

एसईसीएल के अधिकारी भी पहुंचे और राहत कार्य शुरू करने की योजना बनाई। सबसे पहले अंधेरे से निपटने की जुगत लगाते हुए मोबाइल हैलोजन वैन मंगाया गया। कुछ अनुभवी कर्मियों के अलावा रेस्क्यू टीम भी मौके पर पहुंची। देर रात को बचाव का कार्य शुरू हो सका। यह घटना जहां हुई, वहां से मिट्टी निकालने में दिक्कत आ रही है।

घटना में मलबे में दबने से बाल- बाल बच गए अमित सरूता ने बताया कि वह मिट्टी धसकते देख तुरंत बाहर निकल गया, इसलिए वह बच गया। मलबे में केवल लक्ष्मण मरकाम ही नजर आ रहा था। शेष साथी अंदर ही दब गए। उसने पहले लक्ष्मण को मिट्टी हटा कर किसी तरह खींच कर बाहर निकाला। फिर शोर मचाने लगा। इस बीच आसपास से गुजर रहे एसईसीएल कर्मी रूके और इसकी सूचना अधिकारियों को दी गई। अफसरों के मौके पर पहुंचते तक सूर्यास्त होने लगा था।

घटना के बाद रेस्क्यू में विलंब होने से ग्रामीण नाराज हो गए और रात करीब नौ बजे हंगामा करना शुरू कर दिए। दीपका खदान के एक अन्य हिस्से में चल रहे कोयला उत्पादन के कार्य को ग्रामीणों ने बंद कर दिया। खदान में पहले तनाव की वजह से रेस्क्यू के लिए मौके पर कुछ कर्मचारी नहीं पहुंच सके। पुलिस को अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा।

हरदी बाजार में तनाव, चक्का जाम..पुलिस से झड़प..3 मृतकों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग

गांव वालों ने हरदी बाजार थाना परिसर का घेराव कर दिया। यहां से हटाए गए तो हरदी बाजार के सरईसिंगार के पास बजरंग चौक पर चक्का जाम शुरू कर दिए। ग्रामीणों की मांग है कि मृतकों के परिजनों को मुआवजा दिया जाए और पुलिस के साथ झड़प में जो महिलाएं घायल हुई हैं उनका इलाज कराया जाए।

इधर भू विस्थापित नेता सपुरन कुलदीप ने एसईसीएल प्रबंधन द्वारा खदान क्षेत्र में बरती जाने वाली सुरक्षा और उत्खनन बंद होने के बाद उस क्षेत्र को प्रतिबंधित करने के साथ-साथ सुरक्षा उपायों की नजरअंदाजी करने को लेकर घटना की निंदा करते हुए पीड़ित परिवारों को 20-20 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की गई है।फिलहाल हरदी बाजार क्षेत्र में तनाव व्याप्त है।

More Stories

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.