July 1, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा। सरकार बदलने के बाद अब डीएमएफ फंड से 5 साल में हुई कई गड़बड़ियों की जांच पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं ईडी पहले ही अपनी कार्यवाही में डीएमएफ के सारे दस्तवेज अपने साथ ले जा चुके हैं कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित अन्य विभाग के माध्यम से हुए अनाप-शनाप खरीद भी जांच के दयारे में पहले से हैं भाजपा खुद इस मुद्दे को कई वर्ष से उठlती आ रही है पिछले कई वर्षों में डीएमएफ की जितनी भी शिकायतें हुई उनमें जांच और कार्यवाही कभी नहीं की गई l छत्तीसगढ जिला खनिज संस्थान न्यास के व्यवस्थापक और खनिज विभाग के सचिव ने सभी जिलों में DMF की जानकारी सार्वजनिक नहीं करने और मद के रूपये नियम के विपरीत खर्च करने को लेकर नाराजगी जताई थी। साथ ही कुछ जिलों का उल्लेख करते हुए DMF का स्टेटस अपडेट करने का निर्देश भी दिया था, मगर ये जिले आज भी DMF पोर्टल में कोई भी जानकारी देने से बच रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में जिला खनिज संस्थान न्यास (DMFT) को लेकर चर्चा अब भी जोरों पर है। जिलों में DMF के फंड का गाइडलाइंस के खिलाफ जाकर खर्च करने की तमाम शिकायतों के बाद छत्तीसगढ़ जिला खनिज संस्थान न्यास के व्यवस्थापक और खनिज विभाग के सचिव ने पहले भी सभी जिलाधीशों को कड़ा पत्र जारी किया था। इसमें विशेष तौर पर चार जिलों कोरिया, कोरबा, सुकमा एवं बेमेतरा का उल्लेख करते हुए लिखा गया था कि इन जिलों में DMF मद से होने वाले खर्चों सहित अन्य जानकारियां DMF पोर्टल में अपडेट नहीं की जा रही है।

त्रिनेत्र टाइम्स की टीम ने यह जानने के लिए तहक़ीकात की तो पता चला कि पुराने लगभग 8000 कामों में केवल लगभग 3000 काम ही अपलोड हुए हैं।स्टाफ की कमी भी एक कारण हो सकती है क्योंकि दो ऑपरेटर एक अकाउंटेंट ही हैं इस सत्र में कार्य का आबंटन है उन्हें पोर्टल द्वारा ही किया जा रहा है पता चला है कि पूर्व कलेक्टर रानू साहू ने जब कोरबा में पदभार संभाला तब से DMF पोर्टल में ऑनलाइन इंट्री ही बंद कर दी गई थी। कायदे से किसी भी कार्य का आबंटन और भुगतान ऑनलाइन ही किया जाना हैl

नियम विरुद्ध कार्यों को दी जा रही थी स्वीकृति

प्रदेश के समस्त जिला कलेक्टर सह अध्यक्ष जिला खनिज संस्थान न्यास को जारी पत्र में इस बात का उल्लेख भी किया गया था कि उनके द्वारा छत्तीसगढ़ जिला खनिज संस्थान न्यास नियम 2015 के नियम -22 में निहित प्रावधान अनुसार न्यास के पास उपलब्ध निधि से नियम विरुद्ध अतिरिक्त अन्य प्रकार के कार्यों की स्वीकृतियां दी जा रही है, जो कि न्यास के उद्देश्यों के विपरीत है, जबकि कम से कम 60 प्रतिशत राशि उच्च प्राथमिकता के क्षेत्रों एवं 40 प्रतिशत राशि अन्य प्राथमिकता के क्षेत्रों में खर्च किए जाने का प्रावधान है।

सोशल ऑडिट के निर्देशों की भी हुई अवहेलना

जिला खनिज न्यास के तहत हो रहे कार्यों का सामाजिक अंकेक्षण का प्रावधान भी सुनिश्चित किया गया है। इसके पीछे शासन की मंशा डीएमएफ के कार्यों में पारदर्शिता लाने की थी। पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में प्रथम चरण में कोरबा, दंतेवाड़ा एवं बस्तर जिले में सामाजिक अंकेक्षण कराए जाने का निर्देश दिया गया था। मगर कोरबा सहित इन जिलों ने निर्देशों को नजरअंदाज किया।

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