February 12, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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कोरबा  सार्वजनिक क्षेत्र के वृहद उपक्रम कोल् इंडिया के अधीन संचालित एसईसीएल बिलासपुर की कोरबा-पश्चिम क्षेत्र में स्थापित खुले मुहाने की गेवरा कोयला परियोजना अंतर्गत एसईसीएल में भूमिगत खदानों से कोयला उत्पादन बढ़ाने की योजना तैयार की है। नई तकनीक कोल पेस्ट फिलिंग से कोयला उत्पादन में इजाफा किया जाएगा। भूमिगत खदानों में कोल उत्खनन के दौरान पिलर छोड़ दिया जाता है, ताकि छत (रूफ फाल) गिरने की घटना न हो। अब रेत व केमिकल का पेस्ट बनाकर फिलिंग करते हुए खदान को आगे बढ़ाया जाएगा। इससे यह फायदा होगा कि पिलर के लिए छोडे जाने वाले हिस्से से भी कोयला उत्पादन हो सकेगा। पेस्ट फिलिंग तकनीक का ट्रायल भी हो चुका है। जल्द ही इसका इस्तेमाल भूमिगत खदानों में हो सकेगा।
एसईसीएल की ओपन कास्ट परियोजनाओं से लक्ष्य का अधिकांश कोयला उत्पादन होता है। कंपनी की भूमिगत खदानों से कम कोयला उत्पादन हो रहा है। कंपनी प्रबंधन ने भूमिगत खदानों से भी कोयला उत्पादन बढ़ाने की कार्ययोजना तैयार की है। प्रबंधन का ध्यान भूमिगत खदानों में उत्पादन बढ़ाने की ओर केन्द्रीत है। इसके लिए अंडरग्राउंड माइंस में कोयला उत्पादन में वृद्धि के लिए नई पेस्ट फिल तकनीक का इस्तेमाल किए जाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। कोरबा और सोहागपुर की भूमिगत खदानों से इसकी शुरुआत की जाएगी। बताया जा रहा है कि रेत और विद्युत संयंत्रों से निकलने वाले कोयले की राख को केमिकल से मिश्रित कर पेस्ट बनाया जाएगा और भूमिगत खदानों के उन हिस्सों में भरा जाएगा जहां से कोयला निकाला जा चुका है। अब तक यह होता था कि खदान बंद होने के बाद रेत का भराव सुरक्षा की दृष्टि से कर दिया जाता था। अब उत्पादन के साथ ही इस नई तकनीक से खदानों में पिलर की की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। अधिकारियों की माने तो इस तकनीक से अंडर ग्राउंड माइंस के कोयला उत्पादन में 30 फीसदी तक का इजाफा हो जाएगा। पेस्ट फिल पद्धति की वजह से कोयला उत्पादन की लागत पर कोई असर नहीं पडऩे की बात कही जा रही है। खदानों में केवल पेस्ट मशीन की स्थापना में ही प्रबंधन को खर्च करना पड़ेगा। आने वाले खर्च से कम में पेस्ट फिल पद्धति का इस्तेमाल कर कोयला निकाला जा सकेगा। भूमिगत खदानों से वर्ष 2028 तक 30 मिलियन टन कोयला उत्पादन का रोडमैप तैयार किया गया है। साथ ही 2030 तक इसे बढ़ाकर 100 मिलियन टन तक करने की कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है। इसके लिए भूमिगत खदानों में नई तकनीक का इस्तेमाल होगा। जिससे कोयला उत्पादन में बढ़ोतरी होगी।
मेन राइडिंग सिस्टम का प्रस्ताव
भूमिगत खदानों में मेन राइडिंग सिस्टम का भी प्रस्ताव है। खदानों में काफी दूरी तक कोयला खनन किया जा चुका है। ऐसे में कोयला खनन स्पॉट तक पहुंचने में ही कर्मचारी थक जाते हैं। मेन राइडिंग सिस्टम से कोयला खनन स्पॉट तक आसानी से पहुंचने के साथ उन्हें बाहर निकालना भी आसान होगा। भूमिगत खदानों में इस मेन राइडिंग सिस्टम से भी उत्पादन को बढ़ाने की योजना पर काम हो रहा है।
लगाए जाएंगे 57 कंटीन्यूअर माइनर
एसईसीएल की भूमिगत खदानों में 57 कंटीन्यूअर माइनर लगाई जाएगी। बताया जा रहा है कि 15 से 20 कंटीन्यूअर माइनर भूमिगत खदानों में लगाए जा चुके हैं। शेष को जल्द ही खदानों में स्थापित कर लिया जाएगा। जिले की रजगामार भूमिगत खदान में इस तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। इसके अलावा एमडीओ मोड पर भी कोयला उत्पादन का विकल्प एसईसीएल के पास है। इससे निजी कंपनियों को खनन के लिए खदानें लीज पर ली जा सकती है।

 

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