समरसता का संदेश लेकर रायपुर पहुँचा वाराणसी का पावन कलश, श्रीराम मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ भव्य पूजन
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त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** रायपुर। संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में भारतीय जनता पार्टी द्वारा चलाए जा रहे ‘समरसता संकल्प अभियान’ को प्रदेशभर में व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। इसी क्रम में वाराणसी से लाई गई पवित्र माटी युक्त कलश यात्रा शुक्रवार को राजधानी रायपुर पहुँची, जहां श्रद्धा, आस्था और सामाजिक समरसता के वातावरण के बीच श्रीराम मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना एवं कलश स्थापना का आयोजन किया गया।
अम्बिकापुर, बिलासपुर सहित विभिन्न नगरों में भव्य स्वागत प्राप्त करने के बाद यह पवित्र कलश राजधानी पहुँचा। बंजारी माता मंदिर से प्रारंभ हुई शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए श्रीराम मंदिर पहुँची, जहां साधु-संतों की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधानपूर्वक पूजन कर कलश की स्थापना की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और भाजपा कार्यकर्ताओं ने कलश के दर्शन कर संत रविदास के समरस समाज के संदेश को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
भाजपा प्रदेश महामंत्री एवं अभियान के प्रदेश संयोजक अखिलेश सोनी ने बताया कि वाराणसी की पवित्र माटी से युक्त यह कलश अब प्रदेश के सभी संगठन जिलों में पहुंचाया जाएगा। इसका उद्देश्य संत रविदास जी के सामाजिक समरसता, समानता और सद्भाव के संदेश को गांव-गांव तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और समरस समाज निर्माण का जनआंदोलन बनता जा रहा है।
उन्होंने जानकारी दी कि 4 अगस्त को पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में विशेष कलश वितरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रदेश के प्रमुख साधु-संत तथा विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में प्रदेश के 36 संगठन जिलों के जिलाध्यक्षों को पवित्र कलश सौंपे जाएंगे, जिसके बाद ये कलश 479 मंडलों और हजारों गांवों तक पहुंचेंगे।
श्रीराम मंदिर में आयोजित पूजन कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम, श्याम बिहारी जायसवाल, टंकराम वर्मा, प्रदेश महामंत्री यशवंत जैन, डॉ. नवीन मार्कंडेय, गुरु खुशवंत साहेब, विधायकगण, भाजपा पदाधिकारी, समाज प्रमुखों एवं साधु-संतों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में आध्यात्मिक ऊर्जा, सामाजिक समरसता और संत रविदास जी के आदर्शों के प्रति श्रद्धा का विशेष वातावरण देखने को मिला।


