भूपेश की ‘धमकी वाली राजनीति’ पर केदार कश्यप का पलटवार, बोले – सत्ता जाते ही कांग्रेस का असली चेहरा आया सामने
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पुलिस और जनप्रतिनिधियों को चेतावनी देना लोकतंत्र नहीं, राजनीतिक बौखलाहट की निशानी : केदार कश्यप
‘फिर मिलेंगे’ जैसे बयान कांग्रेस की दबाव और डर की संस्कृति का प्रमाण, जनता सब देख रही है
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** रायपुर। छत्तीसगढ़ के वन एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के हालिया बयान को लेकर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि लोकतंत्र में संवाद और मर्यादा का स्थान होता है, लेकिन पुलिस अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को खुले मंच से चेतावनी देना कांग्रेस की हताशा, निराशा और राजनीतिक बौखलाहट का परिचायक है। उन्होंने कहा कि सत्ता से बाहर होने के बाद कांग्रेस के नेताओं की भाषा लगातार आक्रामक और असंयमित होती जा रही है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंताजनक है।
केदार कश्यप ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा पुलिस अधिकारियों और भाजपा जनप्रतिनिधियों को लेकर की गई टिप्पणी किसी जिम्मेदार नेता की भाषा नहीं कही जा सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस आज भी उसी राजनीतिक सोच से बाहर नहीं निकल पाई है, जिसमें सत्ता को प्रभाव और दबाव का माध्यम माना जाता था। लेकिन अब प्रदेश में सुशासन और कानून का राज स्थापित हो चुका है, जहां कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।
‘धमकी नहीं, लोकतांत्रिक मर्यादा में बात करें कांग्रेस नेता’
वन मंत्री ने कहा कि पुलिस प्रशासन को भविष्य की राजनीतिक परिस्थितियों का हवाला देकर चेतावनी देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे न केवल पुलिस बल का मनोबल प्रभावित होता है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा पर भी सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि पुलिस और प्रशासन संवैधानिक व्यवस्था के तहत कार्य करते हैं, किसी राजनीतिक दल के दबाव में नहीं।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन विरोध और धमकी के बीच एक स्पष्ट रेखा होती है। जब विपक्ष अपनी सीमाएं भूलकर संस्थाओं पर दबाव बनाने की कोशिश करता है, तब उसका लोकतांत्रिक चरित्र स्वतः उजागर हो जाता है।
‘जनादेश को स्वीकार नहीं कर पा रही कांग्रेस’
केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता ने भ्रष्टाचार, अहंकार और कुशासन के खिलाफ मतदान करते हुए भाजपा को स्पष्ट जनादेश दिया है। लेकिन कांग्रेस अब तक इस जनादेश को स्वीकार नहीं कर पा रही है। यही कारण है कि उसके वरिष्ठ नेता लगातार संवैधानिक संस्थाओं, प्रशासनिक व्यवस्था और पुलिस तंत्र पर सवाल उठाकर राजनीतिक माहौल को भटकाने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जनता ने कांग्रेस को विपक्ष की भूमिका निभाने का अवसर दिया है, लेकिन कांग्रेस सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभाने के बजाय टकराव और दबाव की राजनीति में लगी हुई है।
‘कानून हाथ में लेने वालों का संरक्षण कांग्रेस की पुरानी आदत’
वन मंत्री ने आरोप लगाया कि जब भी कांग्रेस समर्थित समूह कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाले कदम उठाते हैं और पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई करती है, तब कांग्रेस नेता पुलिस पर ही सवाल खड़े करने लगते हैं। यह दर्शाता है कि कांग्रेस आज भी निष्पक्ष प्रशासनिक व्यवस्था को स्वीकार नहीं कर पा रही है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में कानून का शासन सर्वोच्च है। पुलिस पूरी स्वतंत्रता और निष्पक्षता के साथ अपना दायित्व निभा रही है और सरकार कानून के पालन में किसी भी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होने देगी।
‘डर और दबाव की राजनीति को जनता ने पहले ही नकार दिया’
केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता अब पूरी तरह जागरूक है। वह जानती है कि कौन लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने की बात कर रहा है और कौन उन्हें राजनीतिक दबाव का माध्यम बनाना चाहता है। कांग्रेस को आत्ममंथन करने की आवश्यकता है, न कि पुलिस अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को चेतावनी देकर राजनीतिक माहौल को विषाक्त बनाने की।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार सुशासन, पारदर्शिता और कानून के राज के प्रति प्रतिबद्ध है। प्रदेश में किसी भी प्रकार की धमकी, दबाव या अराजक राजनीति को प्रोत्साहन नहीं दिया जाएगा। जनता शांति, विकास और सुशासन चाहती है और यही भाजपा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
“छत्तीसगढ़ में अब कानून का राज चलेगा, धमकी और दबाव की राजनीति नहीं” – केदार कश्यप


