महानदी विवाद सुलझाने की दिशा में बड़ा ब्रेकथ्रू, केंद्र की पहल से छत्तीसगढ़-ओडिशा में सहमति की नई उम्मीद : रूपकुमारी चौधरी



वर्षों से अटके जल बंटवारे के विवाद को मिलेगा समाधान, संवाद और समन्वय से निकलेगा स्थायी रास्ता
किसानों, उद्योगों और लाखों लोगों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र की मध्यस्थता बनी निर्णायक कड़ी
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** रायपुर। महानदी जल विवाद को लेकर वर्षों से चली आ रही कानूनी और प्रशासनिक जटिलताओं के बीच अब समाधान की नई किरण दिखाई देने लगी है। भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष एवं सांसद रूपकुमारी चौधरी ने छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से लंबित महानदी जल विवाद के समाधान हेतु केंद्र सरकार की मध्यस्थता को ऐतिहासिक, दूरदर्शी और जनहितकारी पहल बताते हुए इसका स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह केवल दो राज्यों के बीच जल बंटवारे का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के भविष्य, किसानों की आजीविका और क्षेत्रीय विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।
रूपकुमारी चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार की सकारात्मक पहल और दोनों राज्यों की सहमति ने यह साबित कर दिया है कि संवाद, सहयोग और समन्वय के माध्यम से जटिल से जटिल विवादों का भी समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में महानदी जल विवाद का ऐसा सर्वमान्य और न्यायसंगत समाधान सामने आएगा, जिससे दोनों राज्यों के हित सुरक्षित रहेंगे।
केंद्र सरकार की सक्रिय भूमिका से बनी सहमति की जमीन
भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि महानदी विवाद लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया में लंबित रहा है, जिसके कारण दोनों राज्यों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दे अटके हुए थे। ऐसे समय में केंद्र सरकार द्वारा मध्यस्थता की पहल और दोनों राज्यों द्वारा उस पर सहमति जताना एक सकारात्मक एवं ऐतिहासिक घटनाक्रम है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू द्वारा केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल से की गई चर्चा तथा केंद्रीय जल आयोग के माध्यम से संयुक्त समिति गठित करने के प्रयासों ने इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह पहल केवल विवाद सुलझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में जल प्रबंधन और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा भी तय करेगी।
दोनों मुख्यमंत्रियों की बैठक पर टिकी सबकी नजरें
रूपकुमारी चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी के बीच प्रस्तावित उच्चस्तरीय बैठक इस पूरे मामले में निर्णायक साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों की सरकारें विकास, जनहित और आपसी विश्वास के आधार पर आगे बढ़ रही हैं, जिससे सकारात्मक परिणाम आने की पूरी संभावना है।
उन्होंने कहा कि जल विवाद जैसे संवेदनशील विषयों पर टकराव की राजनीति के बजाय सहयोग की भावना अधिक प्रभावी साबित होती है। यही कारण है कि अब समाधान की संभावनाएं पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत दिखाई दे रही हैं।
किसानों और आम जनता को मिलेगा बड़ा लाभ
सांसद रूपकुमारी चौधरी ने कहा कि महानदी केवल एक नदी नहीं, बल्कि दोनों राज्यों की जीवनरेखा है। इसके जल पर लाखों किसानों की खेती, पेयजल व्यवस्था, सिंचाई परियोजनाएं और औद्योगिक विकास निर्भर करता है। इसलिए इस विवाद का समाधान सीधे तौर पर किसानों, ग्रामीणों और आम नागरिकों के जीवन को प्रभावित करेगा।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के मार्गदर्शन और दोनों राज्यों की डबल इंजन सरकारों की सकारात्मक सोच से ऐसा समाधान निकलेगा, जो भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी लाभकारी सिद्ध होगा।
‘संवाद से समाधान’ की दिशा में ऐतिहासिक कदम
रूपकुमारी चौधरी ने कहा कि ट्रिब्यूनल की लंबी प्रक्रिया के समानांतर बातचीत और सहमति का रास्ता अपनाना लोकतांत्रिक परिपक्वता का परिचायक है। उन्होंने कहा कि यह घटनाक्रम बताता है कि जब राजनीतिक इच्छाशक्ति और जनहित सर्वोपरि हो, तब वर्षों पुराने विवाद भी समाधान की ओर बढ़ सकते हैं।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार, छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सरकारें मिलकर महानदी जल विवाद का ऐसा संतुलित और न्यायपूर्ण समाधान निकालेंगी, जिससे दोनों राज्यों के विकास को नई गति मिलेगी और जनता का विश्वास और अधिक मजबूत होगा।
“महानदी विवाद के समाधान की दिशा में बढ़ा यह कदम केवल दो राज्यों की जीत नहीं, बल्कि सहमति, संवाद और जनहित की जीत है” – रूपकुमारी चौधरी


