45 साल पुराने जर्जर स्कूल में मौत के साए तले पढ़ रहे मासूम! सराईसिंगार प्राथमिक शाला की बदहाली उजागर, नया भवन मांगते-मांगते थक गए ग्रामीण



छत से टपक रहा पानी, दीवारों में दरारें, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा; सरपंच ने कलेक्टर को सौंपा पत्र, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा। विकासखंड करतला के संकुल केंद्र अजगरबहार अंतर्गत ग्राम नरबदा, ग्राम पंचायत अजगरबहार स्थित प्राथमिक शाला सराईसिंगार की बदहाल स्थिति ने शिक्षा विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 45 से 50 वर्ष पुराने स्कूल भवन में आज भी छोटे-छोटे मासूम अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। बरसात शुरू होते ही स्कूल की छत से लगातार पानी टपक रहा है, कमरों में पानी भर जाता है और दीवारों में दरारें साफ दिखाई दे रही हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस गंभीर समस्या की जानकारी केवल मौखिक रूप से नहीं, बल्कि ग्राम पंचायत अजगरबहार के सरपंच श्री नारायण सिंह गोंड द्वारा 13 जुलाई 2026 को कलेक्टर, कोरबा के नाम लिखित आवेदन देकर भी दी जा चुकी है।

पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि विद्यालय भवन 45-50 वर्ष पुराना और पूरी तरह जर्जर हो चुका है। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकता है, कमरों में पानी भर जाता है तथा भवन की छत कभी भी गिर सकती है, जिससे छात्र-छात्राओं की जान को खतरा बना हुआ है। आवेदन में यह भी बताया गया है कि नया भवन नहीं होने के कारण बच्चों को चबूतरे में बैठाकर पढ़ाई करानी पड़ रही है। सरपंच ने तत्काल नए स्कूल भवन की स्वीकृति देने की मांग की है।
निरीक्षण के दावों पर उठे सवाल
हर वर्ष स्कूल खुलने से पहले शिक्षा विभाग द्वारा विद्यालय भवनों का निरीक्षण, मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाते हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि—
क्या इस विद्यालय का सुरक्षा निरीक्षण हुआ था?
यदि हुआ था तो जर्जर भवन को सुरक्षित किस आधार पर घोषित किया गया?
यदि निरीक्षण नहीं हुआ तो जिम्मेदार अधिकारी कौन हैं?
क्या बच्चों की जान से बढ़कर सरकारी औपचारिकताएं हो गई हैं?
इन अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
इस पूरे मामले में निम्न अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है—
प्रधान पाठक
संकुल समन्वयक/संकुल प्राचार्य
विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO)
जिला शिक्षा अधिकारी (DEO)
लोक निर्माण विभाग (यदि भवन उनके अधीन है)
जिला प्रशासन
यदि विद्यालय की स्थिति पहले से खराब थी तो इसकी रिपोर्ट कब भेजी गई? यदि रिपोर्ट भेजी गई थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि रिपोर्ट ही नहीं भेजी गई तो यह भी गंभीर लापरवाही का मामला है।
हादसे का इंतजार क्यों?
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार नहीं करना चाहिए। जब छत से लगातार पानी टपक रहा है और भवन जर्जर हो चुका है, तब बच्चों को उसी भवन में बैठाकर पढ़ाना बेहद खतरनाक है।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों, पालकों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि—
विद्यालय भवन का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए।
जब तक नया भवन नहीं बनता, बच्चों के लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
नए विद्यालय भवन की तत्काल स्वीकृति देकर निर्माण कार्य शुरू कराया जाए।
इस मामले में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाए।
सबसे बड़ा सवाल
जब सरपंच का लिखित आवेदन कलेक्टर तक पहुंच चुका है और स्कूल की बदहाली सबके सामने है, तब आखिर मासूम बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन कब जागेगा? कहीं ऐसा न हो कि कार्रवाई किसी बड़े हादसे के बाद ही शुरू हो।


