July 14, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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सड़क बनी, गांव डूब गया! गेरांव की गलियों में डेढ़ फीट गंदा पानी, ग्रामीणों का सवाल– क्या जिम्मेदारों को नहीं दिख रही हमारी पीड़ा?

 

मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के बाद बढ़ी जलभराव की समस्या, 15 दिनों से कीचड़ और गंदे पानी में गुजरने को मजबूर ग्रामीण; ठेकेदार और अधिकारियों पर वादाखिलाफी का आरोप
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//* कोरबा। विकास के नाम पर बनी सड़क यदि ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन जाए तो ऐसे विकास पर सवाल उठना स्वाभाविक है। कोरबा विकासखंड की ग्राम पंचायत गेरांव में इन दिनों हालात कुछ ऐसे ही हैं। लगातार बारिश और जल निकासी की समुचित व्यवस्था के अभाव में गांव की मुख्य गलियां तथा गेरांव से बांसाखार मार्ग पर एक से डेढ़ फीट तक गंदा पानी जमा हो गया है। पिछले करीब 15 दिनों से ग्रामीण कीचड़ और जलभराव के बीच आवाजाही करने को मजबूर हैं, लेकिन समस्या का समाधान अब तक नहीं हो सका है।

ग्रामीणों का आरोप है कि मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क निर्माण से पहले गांव में इस तरह जलभराव की स्थिति नहीं बनती थी। सड़क बनने के बाद पानी की निकासी की उचित व्यवस्था नहीं की गई, जिससे बरसात का पूरा पानी गलियों और मार्ग पर जमा होने लगा। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने बरसात से पहले ही ठेकेदार और संबंधित इंजीनियर को इस समस्या से अवगत कराया था। उस समय जल्द समाधान का आश्वासन दिया गया, लेकिन बारिश शुरू होते ही सारे दावे हवा हो गए।
गांव की मुख्य सड़क और गलियां कीचड़ और गंदे पानी से लबालब हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों को रोजाना इसी पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। बुजुर्गों, महिलाओं और मरीजों के लिए घर से निकलना तक कठिन हो गया है। कई लोग फिसलकर चोटिल भी हो चुके हैं। रात के समय जलभराव के कारण सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीवों का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल है।
जलभराव के कारण मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। ग्रामीणों को मलेरिया, डेंगू और त्वचा संबंधी बीमारियों की आशंका सताने लगी है। वहीं गांव आने वाले व्यापारी और अन्य लोग भी इस रास्ते से गुजरने से बच रहे हैं, जिससे ग्रामीणों की दैनिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार अधिकारी इस रास्ते से कभी नहीं गुजरते? यदि गुजरते हैं तो फिर गांव की यह बदहाल तस्वीर उनकी नजरों से कैसे ओझल है? लोगों का कहना है कि विकास कार्यों की गुणवत्ता और जल निकासी की व्यवस्था की अनदेखी का खामियाजा अब पूरे गांव को भुगतना पड़ रहा है।
ग्रामवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि जलभराव की तत्काल निकासी कराई जाए, स्थायी नाली निर्माण कराया जाए तथा सड़क निर्माण में हुई तकनीकी खामियों की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो बरसात के पूरे मौसम में गांव की स्थिति और अधिक गंभीर हो जाएगी और लोगों का घर से निकलना भी मुश्किल हो जाएगा।

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