गांव की गलियों तक पहुंचा मोबाइल गेम का जाल! पढ़ाई छोड़ स्क्रीन में कैद हो रहा बचपन, भविष्य पर मंडरा रहा बड़ा खतरा



स्कूल से लौटते ही गेम में डूब रहे बच्चे, अभिभावक, विद्यालय और समाज की संयुक्त जिम्मेदारी से ही रुकेगी बढ़ती लत।
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//* कटघोरा (जवाली)। कभी गांवों की गलियों में बच्चों की किलकारियां, कबड्डी, क्रिकेट और पारंपरिक खेलों की रौनक दिखाई देती थी, लेकिन अब उनकी जगह मोबाइल स्क्रीन ने ले ली है। ग्राम जवाली सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में बच्चे खाली समय में ऑनलाइन गेम, पबजी, फ्री फायर और अन्य मोबाइल गेम खेलने में घंटों बिताते नजर आ रहे हैं। यह बदलती तस्वीर अब केवल एक आदत नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के लिए गंभीर सामाजिक चिंता बनती जा रही है।
हाल ही में ग्राम जवाली के बरगद के पेड़ के नीचे स्कूल की आधी छुट्टी के दौरान कुछ बच्चे समूह बनाकर मोबाइल गेम खेलते दिखाई दिए। खेल के दौरान तेज आवाज, आपत्तिजनक भाषा और जीत-हार को लेकर आक्रामक व्यवहार भी देखने को मिला। यह दृश्य केवल एक स्थान का नहीं, बल्कि आज कई गांवों की वास्तविकता बन चुका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल गेम की बढ़ती लत बच्चों की पढ़ाई, मानसिक विकास, व्यवहार, शारीरिक स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों की समस्या, नींद की कमी, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में गिरावट और पढ़ाई से दूरी जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। कई बच्चे वास्तविक खेलों और सामाजिक गतिविधियों से भी दूर होते जा रहे हैं।
कोरोना काल में ऑनलाइन शिक्षा के लिए मोबाइल एक जरूरी साधन बना था, लेकिन उसके बाद कई बच्चों के लिए वही मोबाइल मनोरंजन और गेमिंग की लत का माध्यम बन गया। अब अभिभावकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बच्चों को तकनीक का सही और संतुलित उपयोग कैसे सिखाया जाए।
शिक्षकों और समाज के प्रबुद्ध लोगों का कहना है कि केवल मोबाइल छीन लेना समाधान नहीं है। अभिभावकों को बच्चों के साथ समय बिताना होगा, उनकी गतिविधियों पर नजर रखनी होगी और उन्हें खेलकूद, पुस्तक पठन, संगीत, चित्रकला तथा अन्य रचनात्मक कार्यों के लिए प्रेरित करना होगा। विद्यालयों को भी डिजिटल जागरूकता, साइबर सुरक्षा और मोबाइल के संतुलित उपयोग पर नियमित मार्गदर्शन देना चाहिए।
सामाजिक स्तर पर भी यह आवश्यक है कि गांवों में बच्चों के लिए खेल मैदान, पुस्तकालय और रचनात्मक गतिविधियों का वातावरण विकसित किया जाए, ताकि उनका समय सकारात्मक दिशा में लगे। तकनीक ज्ञान का सशक्त माध्यम है, लेकिन उसका असंतुलित उपयोग बच्चों के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
विशेष
“मोबाइल बच्चों के हाथ में ज्ञान का साधन बने, लत का नहीं। खेल जरूरी है, लेकिन शिक्षा, संस्कार, स्वास्थ्य और परिवार से बढ़कर कोई मोबाइल गेम नहीं हो सकता। यदि समय रहते इस बढ़ती प्रवृत्ति पर ध्यान नहीं दिया गया, तो इसका असर आने वाली पीढ़ी के भविष्य पर गहराई से दिखाई देगा।”


