July 6, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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नरबदा प्राथमिक शाला की जर्जर छत से टपक रहा पानी, जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर मासूम बच्चे**
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//* कोरबा। एक ओर सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और बेहतर अधोसंरचना के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर कोरबा विकासखंड के अंतर्गत स्थित प्राथमिक शाला नरबदा की बदहाल स्थिति इन दावों की हकीकत बयां कर रही है। लगातार हो रही बारिश के बीच विद्यालय भवन की छत कई जगहों से टपक रही है। कक्षाओं के अंदर पानी भर जाने से बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है और मासूम विद्यार्थी जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर हैं।
विद्यालय भवन वर्षों पुराना और जर्जर हो चुका है। बारिश के कारण छत से लगातार पानी रिस रहा है, जिससे कक्षाओं में बैठना मुश्किल हो गया है। कई स्थानों पर फर्श पूरी तरह भीग चुका है। ऐसे हालात में न तो बच्चों का ध्यान पढ़ाई में लग पा रहा है और न ही शिक्षक सामान्य रूप से शिक्षण कार्य संचालित कर पा रहे हैं।
सबसे गंभीर बात यह है कि जर्जर भवन कभी भी बड़ा हादसा बन सकता है। यदि छत का कोई हिस्सा गिर जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? यह सवाल अब पूरे शिक्षा विभाग के सामने खड़ा हो गया है।
तीन महीने की गर्मी की छुट्टी में क्यों नहीं हुआ मरम्मत कार्य?
हर वर्ष परीक्षाएं समाप्त होने के बाद लगभग दो से तीन महीने तक विद्यालयों में ग्रीष्मकालीन अवकाश रहता है। यही वह समय होता है जब स्कूल भवनों की मरम्मत, रंगाई-पुताई और आवश्यक रखरखाव कराया जाना चाहिए, ताकि नए शिक्षा सत्र की शुरुआत सुरक्षित वातावरण में हो सके।
लेकिन सवाल यह है कि इतना लंबा समय मिलने के बावजूद प्राथमिक शाला नरबदा की जर्जर छत की मरम्मत क्यों नहीं कराई गई? यदि समय रहते मरम्मत कर दी जाती, तो आज बच्चों को बारिश के बीच इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।

 

जिम्मेदारी आखिर किसकी?
इस पूरे मामले में कई स्तरों पर जिम्मेदारी तय होती है।
विद्यालय के प्रधान पाठक/प्रधानाध्यापक द्वारा भवन की स्थिति की सूचना समय पर संबंधित अधिकारियों को दी गई या नहीं?
विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) ने निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई क्यों नहीं कराई?
जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने भवन मरम्मत एवं सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाए?
लोक निर्माण विभाग (यदि भवन उसके अधीन है) ने भवन की स्थिति का मूल्यांकन क्यों नहीं किया?
जनपद पंचायत एवं जिला प्रशासन ने शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले विद्यालयों की स्थिति की समीक्षा क्यों नहीं की?
यदि सभी स्तरों पर समय रहते जिम्मेदारी निभाई जाती, तो आज बच्चों को इस संकट का सामना नहीं करना पड़ता।
लापरवाही साबित हुई तो अधिकारियों पर गिर सकती है गाज
यदि जांच में यह सामने आता है कि भवन की जर्जर स्थिति की जानकारी पहले से होने के बावजूद मरम्मत नहीं कराई गई या आवश्यक प्रस्ताव लंबित रखा गया, तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय हो सकती है। प्रशासनिक स्तर पर कारण बताओ नोटिस, विभागीय जांच अथवा अन्य कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
अभिभावकों में चिंता, हादसे की आशंका
लगातार बारिश के बीच जर्जर भवन में बच्चों की पढ़ाई को लेकर अभिभावकों में भी चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि शिक्षा जरूरी है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। यदि समय रहते भवन की मरम्मत नहीं कराई गई तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
तत्काल कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग से मांग की है कि प्राथमिक शाला नरबदा के भवन का तत्काल निरीक्षण कराया जाए, आवश्यक होने पर बच्चों की पढ़ाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए तथा जर्जर भवन की शीघ्र मरम्मत या नए भवन का निर्माण कराया जाए, ताकि मासूम बच्चों की पढ़ाई सुरक्षित वातावरण में जारी रह सके।

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