July 4, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//* कटघोरा। करोड़ों रुपये खर्च कर क्षेत्रवासियों को बेहतर और निर्बाध विद्युत आपूर्ति का सपना दिखाया गया। जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में पूरे उत्साह के साथ 33/11 केवी कसनिया विद्युत उपकेंद्र (सब स्टेशन) का लोकार्पण भी कर दिया गया, लेकिन आज भी यह परियोजना अधूरी पड़ी हुई है। लोकार्पण के तीन माह बाद भी सब स्टेशन से नियमित बिजली आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। नतीजतन वार्ड क्रमांक 14 और 15 सहित आसपास के हजारों उपभोक्ता आज भी पुराने फीडरों के भरोसे बिजली संकट झेलने को मजबूर हैं। इस पूरे मामले ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली, परियोजना की गुणवत्ता और ठेकेदार की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कटघोरा नगर पालिका परिषद के वार्ड क्रमांक 15 स्थित पौनी पंसारी के पीछे लगभग 1 करोड़ 85 लाख रुपये की लागत से निर्मित 3.15 एमवीए क्षमता वाले इस विद्युत उपकेंद्र का लोकार्पण कुछ माह पूर्व जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की मौजूदगी में किया गया था। उस समय इसे क्षेत्र की बिजली व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने वाली परियोजना बताया गया था, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रही है।
फीडर अधूरे, इसलिए शुरू नहीं हो सकी बिजली आपूर्ति
जानकारी के अनुसार इस सब स्टेशन से लखनपुर–बरभांठा, सुतर्रा–मोहनपुर तथा कसनिया–शहर तीन अलग-अलग फीडर संचालित किए जाने थे। इसके लिए लगभग 70 पीसीसी पोल, 3.5 किलोमीटर 11 केवी लाइन तथा आधा किलोमीटर एच-बीम पोल लगाकर नई लाइन तैयार की जानी थी। बताया जा रहा है कि लगभग 20 लाख रुपये का यह महत्वपूर्ण कार्य आज तक पूरा नहीं हो सका है, जिसके कारण पूरा सब स्टेशन ही निष्प्रभावी बना हुआ है।
समय सीमा समाप्त, फिर भी कार्रवाई नहीं
परियोजना को लगभग दो से तीन वर्ष पूर्व स्वीकृति मिली थी तथा डेढ़ वर्ष पहले भूमि आवंटित हो चुकी थी। सामान्यतः ऐसे कार्य नौ माह में पूरे हो जाने चाहिए थे, लेकिन समय सीमा समाप्त होने के बाद भी न तो निर्माण पूरा हुआ और न ही जिम्मेदारों के विरुद्ध कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई दे रही है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार ठेकेदार को फीडर निर्माण सहित अन्य आवश्यक कार्य समय पर पूरे करने थे, लेकिन कार्य अधूरा छोड़ दिए जाने के बावजूद विभाग का रवैया अपेक्षित कठोरता वाला नहीं दिख रहा है। इसी कारण क्षेत्र में कई तरह की चर्चाएं भी चल रही हैं।
अधूरी परियोजना का आखिर लोकार्पण क्यों?
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब फीडर तैयार नहीं थे, विद्युत लाइन अधूरी थी और बिजली आपूर्ति प्रारंभ करने की आवश्यक व्यवस्थाएं भी पूरी नहीं हुई थीं, तब आखिर किस आधार पर परियोजना का लोकार्पण किया गया? यदि जनता को तत्काल लाभ नहीं मिलना था, तो इतनी जल्दबाजी किसलिए की गई? यही सवाल अब क्षेत्र के नागरिक लगातार उठा रहे हैं।
बरभांठा और कसनिया के लोग सबसे अधिक प्रभावित
सब स्टेशन चालू नहीं होने के कारण बरभांठा मोहल्ला आज भी ग्रामीण क्षेत्र के लखनपुर फीडर से जुड़ा हुआ है, जिससे लगातार बिजली कटौती, लो-वोल्टेज और तकनीकी खराबियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं कसनिया क्षेत्र को पुराने कटघोरा सब स्टेशन से ही बिजली मिल रही है, जिसके कारण यहां भी लोगों को पर्याप्त राहत नहीं मिल पा रही है।
मानसून से पहले मेंटेनेंस नहीं, अब रोज गुल हो रही बिजली
नगर में लगातार बिजली बाधित होने से आमजन परेशान हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मानसून पूर्व पर्याप्त मेंटेनेंस कार्य नहीं कराया गया, जिसका असर अब रोजाना दिखाई दे रहा है।
इस संबंध में शहरी विद्युत विभाग के जेई रणजीत सिंह पैकरा ने बताया कि मानसून पूर्व एक बार मरम्मत कार्य कराया गया था। हालांकि नागरिकों का कहना है कि यदि समय पर व्यापक मेंटेनेंस किया गया होता तो आज बार-बार बिजली बाधित होने जैसी स्थिति नहीं बनती।
बिजली गई तो पेयजल व्यवस्था भी ठप
कटघोरा नगर के लगभग 11 से 12 वार्ड आमाखोखरा जलाशय की पेयजल व्यवस्था पर निर्भर हैं। बिजली बंद होते ही जलापूर्ति भी पूरी तरह प्रभावित हो जाती है, जिससे हजारों लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ता है।
95 ट्रांसफार्मर, लेकिन एबी स्विच का अभाव
विभागीय सूत्रों के अनुसार नगर में लगभग 95 ट्रांसफार्मर हैं, लेकिन अधिकांश स्थानों पर एबी स्विच उपलब्ध नहीं हैं। इसके कारण किसी एक क्षेत्र में मरम्मत करने के लिए भी बड़े हिस्से की बिजली बंद करनी पड़ती है। यदि सभी क्षेत्रों में एबी स्विच लगाए जाएं तो केवल प्रभावित हिस्से की बिजली बंद कर मरम्मत संभव हो सकेगी और बाकी शहर की आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी।
बिजली उत्पादन का जिला, फिर भी बिजली संकट बरकरार
कोरबा देश के प्रमुख बिजली उत्पादक जिलों में शामिल है, लेकिन विडंबना यह है कि जिले के नगर और ग्रामीण क्षेत्रों के लोग आज भी बार-बार बिजली कटौती, लो-वोल्टेज और अधूरी परियोजनाओं की परेशानी झेल रहे हैं। इससे लोगों में विभाग के प्रति नाराजगी लगातार बढ़ रही है।
क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि कसनिया 33/11 केवी सब स्टेशन को तत्काल पूर्ण रूप से चालू किया जाए, अधूरे फीडरों का निर्माण शीघ्र पूरा कराया जाए तथा कार्य में हुई देरी और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित ठेकेदार की जवाबदेही तय कर उचित कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि उन्हें केवल लोकार्पण नहीं, बल्कि भरोसेमंद और निर्बाध बिजली आपूर्ति चाहिए।

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