बारिश की धार भी नहीं डिगा सकी आस्था, सिद्ध बाबा पहाड़ पर नागपंचमी में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
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मुकुंदपुर में हजारों श्रद्धालुओं ने किए सिद्धबाबा के दर्शन; दुर्गम पहाड़ी, प्राचीन गुफा और रहस्यमयी मान्यताओं ने बढ़ाया धार्मिक आकर्षण, करतला पुलिस ने संभाली सुरक्षा की कमान
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा। सावन की झमाझम बारिश, फिसलन भरे रास्ते और पहाड़ी की कठिन चढ़ाई भी श्रद्धालुओं के कदम नहीं रोक सकी। नागपंचमी के पावन अवसर पर करतला विकासखंड के मुकुंदपुर स्थित सिद्ध बाबा पहाड़ में आस्था का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि पूरा इलाका दिनभर भक्ति, जयकारों और धार्मिक उल्लास से गूंजता रहा। कोरबा जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर तथा जांजगीर-चांपा से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित यह धार्मिक स्थल नागपंचमी पर श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आस्था केंद्र बन गया।
लगातार बारिश के बीच भी हजारों लोग सिद्धबाबा धाम पहुंचे। मौसम ने मेले की मनोरंजन गतिविधियों की रफ्तार जरूर धीमी की, लेकिन पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं की आस्था देखते ही बनी। सुबह से लेकर दिनभर श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा और सिद्ध बाबा पहाड़ भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।
दुर्गम पहाड़ पर आस्था की कठिन चढ़ाई
नागपंचमी महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण पहाड़ी पर स्थित सिद्धबाबा की प्राचीन गुफा रही। करीब 500 मीटर ऊंची और दुर्गम पहाड़ी पर स्थित इस गुफा तक पहुंचना आसान नहीं है। कठिन और चढ़ाई वाले रास्तों से गुजरकर श्रद्धालु सिद्धबाबा धाम तक पहुंचते हैं।
बारिश के कारण रास्ते और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गए, इसके बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कमी नहीं आई। लोगों के लिए यह यात्रा केवल पहाड़ चढ़ने का प्रयास नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास से जुड़ी धार्मिक यात्रा रही।
रहस्य और लोकमान्यता ने बढ़ाया आकर्षण
सिद्धबाबा की गुफा को लेकर क्षेत्र में वर्षों से अनेक लोकमान्यताएं प्रचलित हैं। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार गुफा को रहस्यमयी माना जाता है। जनश्रुति है कि गुफा के भीतर कभी कई तालाब हुआ करते थे और उनमें बड़ी संख्या में कमल के फूल खिलते थे।
ग्रामीणों के बीच प्रचलित एक मान्यता के अनुसार नागपंचमी के दिन भोग लगाने पहुंचे एक ग्रामीण से अनजाने में गुफा के भीतर प्रवेश हो गया। मान्यता है कि वहां उसे देवी-देवताओं के दर्शन हुए। इसके बाद से ग्रामीणों ने गुफा के भीतर प्रवेश करने के बजाय बाहर ही भोग लगाने और पूजा-अर्चना करने की परंपरा अपना ली।
वर्तमान में गुफा के बाहर ही देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं, जहां श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपनी मनोकामनाएं रखते हैं। इन लोकविश्वासों के कारण सिद्ध बाबा पहाड़ केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि क्षेत्र की आस्था और लोकसंस्कृति से जुड़ा महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।
मानस रामायण और भजन-कीर्तन से गूंजा धाम
नागपंचमी महोत्सव के दौरान सिद्धबाबा धाम में मानस रामायण पाठ, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। बारिश के बीच भी श्रद्धालु धार्मिक आयोजनों में शामिल होते रहे। भक्ति गीतों और धार्मिक जयकारों से पहाड़ी क्षेत्र का वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंगा नजर आया।
पुलिस ने संभाली सुरक्षा की जिम्मेदारी
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए करतला पुलिस द्वारा विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई। मेले में लगातार निगरानी रखी गई तथा भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जवानों की तैनाती की गई।
पहाड़ी क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और बारिश को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को विशेष महत्व दिया गया, ताकि दर्शन के लिए पहुंचने वाले लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।
जनप्रतिनिधियों ने भी निभाई सहभागिता
नागपंचमी महोत्सव में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने भी पहुंचकर धार्मिक आयोजन में सहभागिता की। जनपद पंचायत करतला की अध्यक्ष अशोक बाई कंवर, जिला पंचायत सदस्य सावित्री अजय कुमार तथा जनपद सदस्य अनसूया लखन राठौर सहित क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधि महोत्सव में शामिल हुए।
युवाओं की सेवा ने संभाली मेले की व्यवस्था
मेले की व्यवस्थाओं में मुकुंदपुर के युवाओं की भूमिका भी विशेष रही। स्थानीय युवा टीम ने पार्किंग, श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं में सक्रिय सहयोग किया। बारिश और भीड़ के बावजूद युवा लगातार सेवा कार्य में जुटे रहे।
दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही से सिद्ध बाबा पहाड़ का पूरा क्षेत्र जीवंत बना रहा। कहीं पूजा-अर्चना चल रही थी तो कहीं भजन-कीर्तन की गूंज सुनाई दे रही थी। बारिश की बूंदों के बीच श्रद्धालुओं का उत्साह यह संदेश देता रहा कि आस्था के आगे मौसम की चुनौती भी छोटी पड़ जाती है।
मुकुंदपुर की नागपंचमी ने फिर दिखाया—जहां विश्वास गहरा हो, वहां रास्ते की कठिनाई मायने नहीं रखती
सिद्ध बाबा पहाड़ का नागपंचमी महोत्सव इस बार भी श्रद्धा, परंपरा और लोकविश्वास का अनूठा संगम बना। दुर्गम पहाड़ी, प्राचीन गुफा से जुड़ी मान्यताएं, धार्मिक अनुष्ठान और हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने मुकुंदपुर को पूरे दिन आस्था के विराट केंद्र में बदल दिया।







