मोबाइल की चमक में छिपा ‘डिजिटल नशा’ युवाओं को बना रहा खोखला, कॉलेज में गूंजी नशामुक्ति की हुंकार
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कमला नेहरू कॉलेज में बहन स्मृति का प्रेरक संबोधन; डॉ. प्रशांत ने चेताया—नशे से नहीं, राष्ट्र निर्माण से जुड़ाएं युवा अपनी ऊर्जा, प्राध्यापकों और विद्यार्थियों ने ली नशामुक्ति की शपथ
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा। नशे के खिलाफ लड़ाई अब केवल शराब, तंबाकू और धूम्रपान तक सीमित नहीं रह गई है। बदलते डिजिटल दौर में मोबाइल और स्क्रीन का बढ़ता इस्तेमाल भी चिंता का विषय बनता जा रहा है। घंटों मोबाइल पर समय बिताना, सोशल मीडिया और मनोरंजन में लगातार डूबे रहना तथा स्क्रीन से दूरी न बना पाना बच्चों और युवाओं की दिनचर्या, पढ़ाई और सामाजिक जीवन को प्रभावित कर सकता है। इसी गंभीर विषय को लेकर कमला नेहरू महाविद्यालय में नशामुक्ति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रशांत बोपापुरकर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज समाज पारंपरिक नशे की बुराइयों से जूझ ही रहा है, लेकिन इसके साथ डिजिटल युग की एक नई चुनौती भी सामने खड़ी है। मोबाइल का अत्यधिक और अनियंत्रित इस्तेमाल युवाओं के समय, एकाग्रता और रचनात्मक क्षमता को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से तकनीक का उपयोग सुविधा और ज्ञान के लिए करने तथा उसके गुलाम बनने से बचने का आह्वान किया।

बहन स्मृति ने युवाओं को दिखाई सकारात्मक जीवन की राह
ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय से पहुंचीं बहन स्मृति ने विद्यार्थियों को नशामुक्ति अभियान के उद्देश्य और सकारात्मक जीवनशैली के महत्व पर प्रेरक व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की लत व्यक्ति की सोच, व्यवहार और जीवन की दिशा को प्रभावित कर सकती है। युवा अवस्था जीवन निर्माण का महत्वपूर्ण समय है, इसलिए इस दौर में अच्छी आदतों, अनुशासन और सकारात्मक सोच को अपनाना बेहद जरूरी है।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी ऊर्जा को शिक्षा, रचनात्मक कार्यों, खेल, सामाजिक गतिविधियों और राष्ट्रहित के कार्यों में लगाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मजबूत संकल्प और सकारात्मक सोच के माध्यम से युवा स्वयं भी व्यसनमुक्त जीवन जी सकते हैं और अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक कर सकते हैं।
प्राचार्य ने दिलाई नशामुक्ति की शपथ
प्रेरक व्याख्यान के बाद महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रशांत बोपापुरकर ने उपस्थित प्राध्यापकों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं को नशामुक्त जीवन जीने तथा समाज में नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाने की शपथ दिलाई।
प्राचार्य ने कहा कि देश की युवा शक्ति में अपार क्षमता है। युवाओं को अपनी प्रतिभा और ऊर्जा को नशे अथवा किसी भी हानिकारक आदत में गंवाने के बजाय शिक्षा, कौशल, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण में लगाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने साथियों और परिवार के सदस्यों को भी स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली के लिए प्रेरित करने की अपील की।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी रहे मौजूद
शिक्षा संकाय के सभाकक्ष में आयोजित कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकों, कर्मचारियों और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को नशे के विभिन्न स्वरूपों से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें स्वस्थ, अनुशासित और लक्ष्य-केंद्रित जीवन के लिए प्रेरित करना रहा।
इस अवसर पर बीएड प्रभारी डॉ. भारती कुलदीप, प्राध्यापक डॉ. बीना विश्वास, वेदव्रत उपाध्याय, डॉ. अंजू खेस्स, नितेश यादव, शंकर यादव, राकेश गौतम एवं कुणाल दासगुप्ता सहित महाविद्यालय के अन्य प्राध्यापक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
महाविद्यालय में विद्यार्थी विकास कार्यक्रम की सहयोगी संस्था स्टारलाइट एड इंडिया फाउंडेशन की ओर से स्टेट मैनेजर रघुनाथन नायर, सीनियर मैनेजर कविता शर्मा एवं प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर रितेश सिंह भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
संदेश साफ—तकनीक का इस्तेमाल करें, लेकिन उसके आदी न बनें
कार्यक्रम में विद्यार्थियों के बीच यह संदेश प्रमुखता से रखा गया कि आधुनिक तकनीक शिक्षा और ज्ञान का महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन उसका संतुलित उपयोग आवश्यक है। मोबाइल और डिजिटल माध्यमों को जीवन का साधन बनाया जाए, जीवन का केंद्र नहीं।
नशामुक्ति की शपथ के साथ कार्यक्रम ने युवाओं के बीच स्वस्थ सोच, आत्मअनुशासन और सकारात्मक जीवनशैली का संदेश दिया। कॉलेज परिसर से उठी यह आवाज निश्चित रूप से परिवार और समाज तक पहुंचाने की दिशा में एक सार्थक पहल साबित हो सकती है।







