जनजातीय सेवा के तीन तपस्वियों का भव्य अभिनंदन, पद्मश्री विभूतियों की जीवनगाथा से गूंजा रायपुर



वनवासी कल्याण आश्रम के सम्मान समारोह में सेवा, समर्पण और संघर्ष को मिला नमन, युवाओं को मिला जनसेवा का नया संदेश
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//* रायपुर,27जून 2026 जनजातीय समाज की सेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य और सशक्तीकरण के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाले तीन पद्मश्री सम्मानित व्यक्तित्वों का शनिवार को रायपुर में भव्य सम्मान किया गया। वनवासी विकास समिति के तत्वावधान में रोहिणीपुरम स्थित शबरी कन्या आश्रम परिसर में आयोजित सम्मान समारोह सेवा, समर्पण और राष्ट्रभावना का प्रेरणादायी संगम बन गया। समारोह में पद्मश्री बुधरी ताती, पद्मश्री डॉ. राम गोडबोले एवं पद्मश्री श्रीमती सुनीता गोडबोले का शाल, श्रीफल एवं स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया।

वर्ष 2026 के पद्मश्री सम्मान से अलंकृत इन तीनों विभूतियों ने बस्तर सहित जनजातीय अंचलों में दशकों तक निस्वार्थ भाव से कार्य करते हुए समाज के सबसे वंचित वर्गों के जीवन में परिवर्तन लाने का उल्लेखनीय कार्य किया है। उनके संघर्ष, सेवा और त्याग की गाथा ने समारोह में उपस्थित सभी लोगों को भावुक कर दिया।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता वनवासी कल्याण आश्रम की केंद्रीय प्रशिक्षण समिति की सदस्या श्रीमती माधवी जोशी ने कहा कि इन तीनों विभूतियों का जीवन केवल सम्मान प्राप्त करने की कहानी नहीं, बल्कि सेवा, त्याग और राष्ट्र समर्पण का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि बस्तर जैसे दुर्गम और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में वर्षों तक रहकर जनजातीय समाज के उत्थान के लिए कार्य करना साधारण बात नहीं है। इनकी तपस्या आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है और समाज को सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश देती है।
समारोह में पद्मश्री बुधरी ताती के जनजातीय महिलाओं के सशक्तीकरण और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय योगदान की विस्तार से चर्चा की गई। वहीं, डॉ. राम गोडबोले एवं श्रीमती सुनीता गोडबोले के दशकों तक बस्तर के वनांचलों में रहकर स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक विकास के क्षेत्र में किए गए कार्यों को समाज के लिए अनुकरणीय बताया गया। उपस्थित युवाओं, समाजसेवियों और नागरिकों ने इनकी संघर्षमयी जीवन यात्रा से प्रेरणा लेने का संकल्प भी व्यक्त किया।
कार्यक्रम के अंत में वनवासी विकास समिति के अध्यक्ष उमेश कच्छप ने सभी अतिथियों, कार्यकर्ताओं और नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन महान विभूतियों का सम्मान करना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उनके सेवा-मार्ग पर चलने का संकल्प है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के बीच इन विभूतियों ने कठिन परिस्थितियों में जो सेवा कार्य किए हैं, वही उन्हें आज इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान तक लेकर पहुंचे हैं। यह गौरव वर्षों की तपस्या, त्याग और समर्पण का परिणाम है।

उन्होंने बताया कि वनवासी कल्याण आश्रम की स्थापना वर्ष 1952 में जशपुर से हुई थी और संस्था अपने 75 वर्ष पूर्ण करने की ओर अग्रसर है। आज भी संगठन के कार्यकर्ता देशभर के जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन और सामाजिक विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। पद्मश्री सम्मानित विभूतियों के जीवन से मिली प्रेरणा इस सेवा यात्रा को और अधिक सशक्त बनाएगी।
समारोह के दौरान शबरी आश्रम छात्रावास की छात्राओं ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत कर वातावरण को राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत कर दिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम्” के सामूहिक गायन के साथ हुआ। मंच संचालन राजीव शर्मा ने किया।
इस अवसर पर वनवासी विकास समिति छत्तीसगढ़ के रामनाथ कश्यप, डॉ. अनुराग जैन, डॉ. विजय शांडिल्य, रवि गोयल, श्रीमती आरती दुबे, श्रीमती वैजयंती कच्छप, गिरीश गोपीनाथ, नागेश काले, शशांक शर्मा सहित अनेक प्राध्यापक, समाजसेवी, प्रबुद्ध नागरिक, मीडिया प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में रायपुरवासी उपस्थित रहे। समारोह ने यह संदेश दिया कि सच्ची सेवा और समर्पण का मूल्य समय अवश्य पहचानता है, और समाज ऐसे कर्मयोगियों का सदैव ऋणी रहेगा।


