डिजिटल क्रॉप सर्वे अनिवार्य: बिना सत्यापन नहीं खरीदा जाएगा किसानों का धान, 1 जुलाई से शुरू होंगे पंजीयन और संशोधन



राज्य सरकार ने धान खरीदी व्यवस्था में किया बड़ा बदलाव, एग्रीस्टेक पोर्टल और डिजिटल क्रॉप सर्वे से तय होगा धान का रकबा, बायोमेट्रिक व्यवस्था भी रहेगी लागू।
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//* कोरबा। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों के लिए राज्य सरकार ने इस बार नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब केवल उन्हीं किसानों का धान सरकारी उपार्जन केंद्रों में खरीदा जाएगा, जिनकी फसल का डिजिटल क्रॉप सर्वे (Digital Crop Survey) पूरा हो चुका होगा। सरकार ने धान खरीदी प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाते हुए एग्रीस्टेक (AgriStack) पोर्टल को अनिवार्य कर दिया है। पिछले वर्ष किसानों को कुछ राहत दी गई थी, लेकिन इस बार किसी प्रकार की छूट नहीं मिलेगी।
खाद्य विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार धान बेचने के लिए किसानों को अब अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। किसान पंजीयन एवं संशोधन की पूरी प्रक्रिया खाद्य विभाग की वेबसाइट के ऑनलाइन सोसाइटी मॉड्यूल के माध्यम से पूरी की जाएगी। वर्ष 2025-26 में पंजीकृत किसानों को नया आवेदन नहीं करना होगा, लेकिन उन्हें अपने रिकॉर्ड एग्रीस्टेक पोर्टल पर अपडेट कराना अनिवार्य रहेगा।
इस वर्ष नए किसान पंजीयन तथा पुराने पंजीयन में संशोधन का कार्य 1 जुलाई से 31 अक्टूबर 2026 तक किया जाएगा। इस दौरान किसान अपनी भूमि, खसरा, बैंक खाता, आधार, नॉमिनी सहित अन्य आवश्यक जानकारियों में संशोधन करा सकेंगे। जिन किसानों ने नई भूमि खरीदी है या बंटवारे के बाद भूमि प्राप्त हुई है, उन्हें भी उसका विवरण पोर्टल पर दर्ज कराना होगा।
धान खरीदी की सबसे महत्वपूर्ण शर्त डिजिटल क्रॉप सर्वे होगी। सरकार के अनुसार केवल उसी भूमि पर उत्पादित धान की खरीदी होगी, जिसका डिजिटल सर्वे पूरा होगा। यह सर्वे 15 अगस्त से 31 अक्टूबर के बीच किया जाएगा। सर्वे के दौरान खेत की वास्तविक स्थिति, फसल, रकबा और जीपीएस आधारित लोकेशन का सत्यापन किया जाएगा। इससे फर्जी पंजीयन, गलत रकबा और अनियमितताओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
वनाधिकार पट्टाधारी एवं डूबान क्षेत्र के किसानों के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। ऐसे किसानों को अपने खसरा या कंपार्टमेंट नंबर के साथ खेत का अक्षांश (Latitude) एवं देशांतर (Longitude) उपलब्ध कराना होगा। विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचकर उसका भौतिक सत्यापन करेंगे। पिछले वर्ष पीवी ऐप के माध्यम से दर्ज जानकारी को मान्यता दी गई थी, लेकिन इस बार वह छूट समाप्त कर दी गई है।
राज्य सरकार ने इस बार बटाईदार (अधिया/रेगहा) किसानों तथा संस्थागत किसानों के लिए भी एग्रीस्टेक में पंजीयन अनिवार्य कर दिया है। ऐसे किसानों को एग्रीस्टेक के ऑथराइजेशन मॉड्यूल के माध्यम से अधिकृत किया जाएगा। खाद्य विभाग ने अधिकारियों को ग्रामवार एवं कृषकवार खसरा और कंपार्टमेंट नंबर की सूची उपलब्ध करा दी है, जिसके आधार पर मैदानी अमला डिजिटल सत्यापन करेगा।
जिन किसानों ने अब तक एग्रीस्टेक पोर्टल पर पंजीयन नहीं कराया है, उन्हें सबसे पहले वहां अपना पंजीयन कराना होगा। इसके बाद संबंधित सहकारी समिति में जाकर अपनी भूमि, बैंक खाता, नॉमिनी और अन्य आवश्यक जानकारी ऑनलाइन सोसाइटी मॉड्यूल में दर्ज करानी होगी। एग्रीस्टेक पोर्टल पर भूमि एवं फसल का विवरण अपडेट होने के बाद ही किसान समर्थन मूल्य पर धान बेच सकेंगे।
सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से धान खरीदी प्रणाली अधिक पारदर्शी होगी, वास्तविक किसानों को लाभ मिलेगा तथा फर्जी पंजीयन, गलत रकबे और बिचौलियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा। इस बार धान खरीदी केंद्रों में बायोमेट्रिक आधारित खरीदी व्यवस्था भी पहले की तरह लागू रहेगी, जिससे किसान की पहचान और खरीदी प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित एवं पारदर्शी बनी रहेगी।
खाद्य विभाग ने सभी किसानों से अपील की है कि वे समय-सीमा के भीतर अपना पंजीयन, रिकॉर्ड अपडेट और डिजिटल क्रॉप सर्वे अवश्य पूरा करा लें, अन्यथा समर्थन मूल्य पर धान बेचने की पात्रता प्रभावित हो सकती है।


