घने जंगलों से गूंजा योग का संदेश: वनांचल के दूरस्थ गांवों में एकल अभियान ने जगाई स्वास्थ्य और संस्कार की अलख



देवपहरी से साखो, बड़गांव, गढ़ उपरोड़ा, गढ़ बसाहट और जाता डांड तक विश्व योग दिवस पर उमड़ा उत्साह, बच्चों से बुजुर्गों तक ने किया सामूहिक योगाभ्यास
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//* कोरबा/देवपहरी, 21 जून 2026। जहां शहरों में योग दिवस बड़े मंचों पर मनाया जा रहा था, वहीं कोरबा जिले के घने जंगलों और दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में भी योग की अलख पूरे उत्साह के साथ जगाई गई। स्वयंसेवी संस्था एकल अभियान देवपहरी के प्रयासों से सुदूर ग्रामों में विश्व योग दिवस केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, संस्कार और जनजागरण का उत्सव बनकर सामने आया। बच्चों, महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने एक साथ योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन और सकारात्मक सोच का संदेश दिया।

एकल अभियान के अंतर्गत संचालित विद्यालय ग्रामों में आयोजित कार्यक्रमों ने यह साबित कर दिया कि योग केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के अंतिम छोर तक उसकी पहुंच बन रही है। जंगलों और पहाड़ों से घिरे गांवों में सुबह-सुबह जब योग, प्रार्थना और मंत्रोच्चार की गूंज सुनाई दी तो पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता से भर उठा।
साखो गांव बना योग चेतना का केंद्र
संच केंद्र देवपहरी के अंतर्गत विद्यालय ग्राम साखो में विश्व योग दिवस का मुख्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम संच समिति सचिव कृष्णा कुमार कंवर की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती और माँ भारती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं ॐकार तथा गायत्री मंत्र के उच्चारण के साथ हुआ।
योग प्रशिक्षक सुनीता रौतिया ने बच्चों, महिलाओं और ग्रामीणों को विभिन्न योगासन एवं प्राणायाम का अभ्यास कराया। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण 20 दिवसीय ऑनलाइन योग प्रशिक्षण के अनुरूप तैयार किया गया, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों के लोग भी योग की सही विधियों से परिचित होकर उसका लाभ उठा सकें।
कार्यक्रम में वरिष्ठ नागरिक अमृतलाल रौतिया, भजन सिंह, शिशुपाल कंवर, आचार्यगण ज्योति रौतिया, सुनीता रौतिया, संच प्रशिक्षक चंद्रा कुमार राठिया सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
वनांचल के कई गांवों में एक साथ योग की गूंज
विश्व योग दिवस के अवसर पर एकल अभियान के विभिन्न विद्यालय ग्रामों में भी विशेष योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। बड़गांव में आचार्या गणेशी कंवर, गढ़ उपरोड़ा एवं गढ़ बसाहट में आचार्या सूरज राठिया और सविता मंझवार, जबकि जाता डांड में आचार्य बालकुमार राठिया ने बच्चों एवं ग्रामीणों को योगाभ्यास कराया। इन कार्यक्रमों में ग्राम प्रमुखों, अभिभावकों और ग्रामीणों ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई।
गढ़ बसाहट क्षेत्र में ग्राम प्रमुख मानसिंह मंझवार की विशेष उपस्थिति रही, जिन्होंने योग को स्वस्थ समाज निर्माण का आधार बताया।
योग के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश
संच समिति सचिव कृष्णा कुमार कंवर ने कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं, बल्कि यह अनुशासित, संतुलित और सकारात्मक जीवन जीने की कला है। उन्होंने सभी ग्रामवासियों से प्रतिदिन योग करने का आह्वान किया तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधारोपण अभियान में भी बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की।

उन्होंने कहा कि वनांचल क्षेत्रों में योग के प्रति बढ़ती जागरूकता यह दर्शाती है कि समाज का अंतिम व्यक्ति भी अब स्वास्थ्य और संस्कार के महत्व को समझ रहा है। योग व्यक्ति के साथ-साथ पूरे समाज को स्वस्थ और जागरूक बनाने की शक्ति रखता है।
जंगलों के बीच से निकला स्वास्थ्य और संस्कार का संदेश
कार्यक्रमों का समापन शांति पाठ एवं प्रसाद वितरण के साथ हुआ। विश्व योग दिवस पर एकल अभियान देवपहरी द्वारा आयोजित इन कार्यक्रमों ने वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, अनुशासन और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान का संदेश पहुंचाया।
दूर-दराज के गांवों में आयोजित यह योग अभियान इस बात का जीवंत उदाहरण बना कि यदि समर्पण और सेवा का भाव हो तो योग, शिक्षा और संस्कार की रोशनी समाज के अंतिम व्यक्ति तक भी पहुंचाई जा सकती है। विश्व योग दिवस पर वनांचल क्षेत्र से निकला यह संदेश न केवल स्वास्थ्य जागरूकता का प्रतीक बना, बल्कि ग्रामीण भारत की जागृत होती सकारात्मक चेतना का भी प्रेरक उदाहरण साबित हुआ।


