August 13, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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“बुलडोजर का ब्रेक आखिर कर्मचारी के मकान पर ही क्यों लगा?” : मुड़ापार कार्रवाई पर उठे बड़े सवाल, निगम की निष्पक्षता कटघरे में

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अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम ने घेरा-बाउंड्री तो तोड़ी, लेकिन शासकीय जमीन पर बने कथित मकान को छोड़ लौट गई JCB | शहर में चर्चा—क्या किसी दबाव या ‘सेटिंग’ के कारण रुकी कार्रवाई?
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//*  कोरबा। नगर निगम कोरबा की अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई अब खुद सवालों के घेरे में आ गई है। मुड़ापार स्थित अंबेडकर भवन के समीप शनिवार को निगम द्वारा चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान के बाद लोगों के बीच एक ही चर्चा है—“जब कार्रवाई करने पहुंचे थे तो फिर कथित अतिक्रमित मकान को क्यों छोड़ दिया गया?”
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस स्थान पर कार्रवाई हुई, वहां नगर निगम के एक कर्मचारी द्वारा शासकीय भूमि पर मकान निर्माण किए जाने की शिकायत लंबे समय से की जा रही थी। शिकायत के बाद निगम अमला जेसीबी और अन्य संसाधनों के साथ मौके पर पहुंचा, लेकिन कार्रवाई केवल बाउंड्रीवाल और घेराबंदी तक सीमित रही। जिस मकान को लेकर शिकायत थी, उसे बिना छुए टीम वापस लौट गई।
कार्रवाई या खानापूर्ति?

 

 

मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि यदि जमीन शासकीय है और अतिक्रमण अवैध है तो कार्रवाई सभी पर समान रूप से होनी चाहिए थी। लेकिन जिस तरह से मकान को छोड़कर केवल आसपास की संरचनाओं को हटाया गया, उससे कार्रवाई की मंशा पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।
नागरिकों का कहना है कि यदि किसी आम व्यक्ति ने सरकारी जमीन पर कब्जा किया होता तो संभवतः पूरा निर्माण ध्वस्त कर दिया जाता, लेकिन यहां मामला निगम के ही कर्मचारी से जुड़ा होने के कारण कार्रवाई अधूरी छोड़ दी गई। इससे यह धारणा मजबूत हो रही है कि नियम-कानून आम लोगों के लिए अलग और प्रभावशाली लोगों के लिए अलग हैं।
क्या किसी का दबाव था या फिर ‘सेटिंग’ का खेल?
कार्रवाई के बाद शहर में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लोगों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आखिर जेसीबी कर्मचारी के कथित अतिक्रमित मकान तक पहुंचकर क्यों रुक गई? क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति का दबाव था? क्या अधिकारियों को बीच में कोई निर्देश मिला? या फिर मामला पहले से ही “मैनेज” कर लिया गया था?
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन निगम की आधी-अधूरी कार्रवाई ने संदेहों को जन्म जरूर दे दिया है। लोगों का कहना है कि यदि कार्रवाई निष्पक्ष थी तो मकान को छोड़ने का कारण सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
कार्रवाई करने वाली टीम भी सवालों के घेरे में
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि जांच में यह साबित होता है कि शासकीय भूमि पर अवैध निर्माण किया गया है और जानबूझकर उसे बचाया गया, तो केवल अतिक्रमणकर्ता ही नहीं बल्कि कार्रवाई करने पहुंचे जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
लोगों का तर्क है कि यदि मौके पर मौजूद अधिकारियों ने नियमों के विपरीत किसी निर्माण को संरक्षण दिया है, तो उनके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए। आखिर किस आधार पर एक निर्माण को तोड़ा गया और दूसरे को छोड़ दिया गया? इसका जवाब निगम प्रशासन को देना होगा।
जनता के सामने खड़े हुए बड़े सवाल
यदि भूमि शासकीय है तो कथित अतिक्रमित मकान को क्यों नहीं हटाया गया?

 

 

क्या निगम कर्मचारी होने के कारण कार्रवाई में नरमी बरती गई?
क्या अधिकारियों और संबंधित व्यक्ति के बीच किसी प्रकार की मिलीभगत है?
कार्रवाई के दौरान कौन-कौन अधिकारी मौजूद थे और उनका निर्णय क्या था?
यदि शिकायत सही पाई जाती है तो संबंधित कर्मचारी पर विभागीय कार्रवाई कब होगी?
क्या कार्रवाई को प्रभावित करने वालों की जवाबदेही तय होगी?
निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई की मांग
मुड़ापार की इस कार्रवाई के बाद अब स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग तेज कर दी है। नागरिकों का कहना है कि यदि अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया जा रहा है तो उसमें किसी भी प्रकार का पक्षपात नहीं होना चाहिए। कानून की नजर में सभी बराबर हैं और सरकारी जमीन पर कब्जा चाहे आम व्यक्ति करे या सरकारी कर्मचारी, कार्रवाई एक समान होनी चाहिए।
फिलहाल नगर निगम की इस कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब लोगों की नजर निगम प्रशासन पर टिकी है कि वह इन आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण देता है और कथित अतिक्रमण तथा कार्रवाई में बरती गई नरमी को लेकर क्या कदम उठाता है। जब तक इन सवालों के जवाब सामने नहीं आते, तब तक मुड़ापार की यह कार्रवाई शहर में चर्चा और विवाद का विषय बनी रहेगी।

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