सुशासन तिहार का बड़ा असर: शिकायतों के घेरे में आए दो पंचायत सचिव हटाए गए, प्रशासन ने दिखाई सख्ती



ग्रामीणों की आवाज बनी कार्रवाई का आधार, कनकी और सरगबुंदिया में सचिव बदले; लापरवाही और अनियमितताओं के आरोपों पर प्रशासन का कड़ा संदेश
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//* कोरबा। मुख्यमंत्री के सुशासन तिहार अभियान के दौरान ग्रामीणों द्वारा उठाई गई शिकायतों का असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। करतला विकासखंड की ग्राम पंचायत कनकी और सरगबुंदिया में पंचायत सचिवों के खिलाफ मिली शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दोनों सचिवों को उनके पद से हटाकर स्थानांतरित कर दिया है। इस कार्रवाई को ग्रामीणों की आवाज की जीत और प्रशासन की जवाबदेही का मजबूत उदाहरण माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि ग्राम पंचायत कनकी में लंबे समय से विकास कार्यों की गति और पंचायत संचालन को लेकर ग्रामीणों में असंतोष था। सुशासन तिहार के दौरान जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने पंचायत सचिव के विरुद्ध कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही, विकास कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं होने तथा वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोपों की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने मामले की जांच कराई।
वहीं ग्राम पंचायत सरगबुंदिया में भी उपसरपंच, पंचों और अन्य जनप्रतिनिधियों ने पंचायत सचिव के कार्यों पर सवाल उठाते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की थी। शिकायतों में पंचायत कार्यों के प्रति उदासीनता, समय पर कार्यों का निष्पादन नहीं होने तथा प्रशासनिक जिम्मेदारियों के निर्वहन में कमी की बात कही गई थी।
जांच के बाद प्रशासन का एक्शन, तत्काल बदले गए सचिव
शिकायतों की समीक्षा और जांच के बाद जिला पंचायत कोरबा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी दिनेश नाग ने तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करते हुए कनकी के सचिव को ग्राम पंचायत अमलडीहा स्थानांतरित कर दिया। वहीं सरगबुंदिया के सचिव को जनपद पंचायत कार्यालय करतला में संलग्न करने के आदेश जारी किए गए।
इसके साथ ही अमलडीहा में पदस्थ सचिव को कनकी में उनकी मूल पदस्थापना देते हुए सरगबुंदिया पंचायत का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। प्रशासन का यह कदम स्पष्ट संकेत माना जा रहा है कि पंचायत स्तर पर लापरवाही और शिकायतों को अब नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
ग्रामीणों ने कहा— अब दिख रहा है सुशासन का असर
कार्रवाई के बाद दोनों पंचायतों में चर्चा का विषय यही है कि पहली बार शिकायतों पर इतनी तेजी से निर्णय लिया गया है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि जनहित के कार्यों में लापरवाही होगी तो जवाबदेही भी तय होगी। लोगों ने प्रशासन की कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि इससे यह संदेश गया है कि शासन की योजनाओं और विकास कार्यों में किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
प्रशासन का स्पष्ट संदेश
सुशासन तिहार के माध्यम से प्राप्त शिकायतों पर हुई यह कार्रवाई केवल स्थानांतरण का मामला नहीं, बल्कि पंचायत व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रशासन ने संकेत दिया है कि जनहित से जुड़े मामलों में शिकायतों की अनदेखी नहीं होगी और जांच में तथ्य सामने आने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों का मानना है कि यदि इसी तरह शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई होती रही तो पंचायत स्तर पर कार्यों की गुणवत्ता सुधरेगी और आम जनता का शासन-प्रशासन पर भरोसा और मजबूत होगा।


