June 14, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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30 वर्षों बाद बना दुर्लभ संयोग: कल सोमवती अमावस्या पर बरसेगी भोलेनाथ की विशेष कृपा, पितृ तर्पण, शिव पूजन और दान-पुण्य का मिलेगा अक्षय फल

 

 

पुरुषोत्तम मास में आई सोमवती अमावस्या का अद्भुत संयोग, धर्माचार्यों ने बताया अत्यंत फलदायी; शिव आराधना, पीपल पूजन और पितृ तर्पण से बनेंगे शुभ योग
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//**  सनातन धर्म में अमावस्या तिथि को पितरों की आराधना और आत्मशुद्धि का पर्व माना जाता है, लेकिन जब अमावस्या सोमवार के दिन आती है तो उसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस वर्ष 15 जून 2026 को पड़ रही सोमवती अमावस्या अनेक धार्मिक दृष्टियों से अत्यंत विशेष मानी जा रही है। धर्माचार्यों के अनुसार यह संयोग भगवान शिव की उपासना, पितृ तर्पण, स्नान-दान और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत पुण्यदायी है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस दिन किए गए जप, तप, व्रत, दान और पूजा-अर्चना से जीवन के कष्टों का निवारण होता है तथा परिवार में सुख, समृद्धि और शांति का आगमन होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवती अमावस्या पर भगवान शिव की आराधना करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है। वहीं पितरों के निमित्त तर्पण करने से पितृ दोष शांत होता है और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यही कारण है कि देशभर के शिवालयों, तीर्थस्थलों और पवित्र नदियों के तटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।
क्या है सोमवती अमावस्या का महत्व?
धर्मग्रंथों में सोमवती अमावस्या को पुण्य, सौभाग्य और मोक्षदायिनी तिथि बताया गया है। सोमवार भगवान शिव का प्रिय दिन माना जाता है और अमावस्या पितृ आराधना की तिथि होती है। इन दोनों का संयोग व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करने से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है, परिवार में खुशहाली आती है तथा संतान, स्वास्थ्य और धन संबंधी बाधाएं दूर होती हैं। साथ ही पितरों की कृपा प्राप्त होने से घर-परिवार में उन्नति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
प्रातःकाल से शुरू करें पूजा की तैयारी
सोमवती अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना अत्यंत शुभ माना गया है। यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी, सरोवर या कुंड में स्नान करें। घर में स्नान करते समय जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी पुण्यदायी माना गया है।
स्नान के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान सूर्य को जल अर्पित करें तथा दिनभर सकारात्मक विचारों और धार्मिक कार्यों में समय व्यतीत करें।
ऐसे करें भगवान शिव का पूजन
पूजा स्थान को स्वच्छ कर भगवान शिव, माता पार्वती और नंदी महाराज का स्मरण करें। इसके बाद शिवलिंग पर गंगाजल, शुद्ध जल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें।
अभिषेक के बाद बेलपत्र, भांग, धतूरा, चंदन, अक्षत, सफेद पुष्प, फल और नैवेद्य अर्पित करें। श्रद्धा के साथ “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें तथा शिव चालीसा, रुद्राष्टक अथवा महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें।
धर्माचार्यों के अनुसार इस दिन किया गया शिव अभिषेक व्यक्ति के जीवन से नकारात्मकता को दूर कर सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।
पीपल वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व
सोमवती अमावस्या पर पीपल वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि पीपल में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का वास होता है। श्रद्धालु पीपल वृक्ष में जल अर्पित कर दीप प्रज्ज्वलित करते हैं तथा उसकी परिक्रमा करते हैं।
सुहागिन महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना करते हुए पीपल की परिक्रमा करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है और वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है।
पितृ तर्पण से मिलता है पूर्वजों का आशीर्वाद
सोमवती अमावस्या को पितृ तर्पण के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन तिल, कुश और जल से पितरों का तर्पण किया जाता है। मान्यता है कि इससे पितृ दोष का प्रभाव कम होता है तथा परिवार पर पूर्वजों की कृपा बनी रहती है।
धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और विधि-विधान से अपने पितरों का स्मरण करता है, उसके जीवन में आने वाली अनेक बाधाएं स्वतः दूर होने लगती हैं।
इन सामग्रियों से करें पूजा
पूजा में गंगाजल, शुद्ध जल, दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, बेलपत्र, चंदन, अक्षत, धूप, दीप, सफेद पुष्प, नारियल, मौसमी फल, काले तिल, गुड़, पंचामृत, तुलसी पत्र (विष्णु पूजन हेतु) तथा दक्षिणा का उपयोग शुभ माना गया है।
दान-पुण्य से बढ़ता है पुण्यफल
धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़, फल, जल से भरा घड़ा, छाता, चप्पल तथा जरूरतमंदों को भोजन कराने का विशेष महत्व है। गरीबों और असहाय लोगों की सहायता करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
इन कार्यों से करें परहेज
सोमवती अमावस्या के दिन क्रोध, विवाद, निंदा, असत्य भाषण, नशा, मांसाहार और तामसिक भोजन से बचना चाहिए। इस दिन संयम, सदाचार और सेवा भाव को विशेष महत्व दिया गया है।
शिव कृपा, पितृ आशीर्वाद और आध्यात्मिक उन्नति का महापर्व
सोमवती अमावस्या केवल एक धार्मिक तिथि नहीं बल्कि श्रद्धा, विश्वास, कृतज्ञता और आध्यात्मिक साधना का महान अवसर है। यह दिन हमें अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान व्यक्त करने, भगवान शिव की आराधना करने और समाज के जरूरतमंद लोगों की सहायता करने की प्रेरणा देता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पावन अवसर पर किए गए पुण्य कार्य जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
हर-हर महादेव! शिव कृपा और पितरों के आशीर्वाद से मंगलमय हो सोमवती अमावस्या का यह पावन पर्व। 🕉️🙏

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