August 14, 2026

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पुरुषोत्तम मास में महामृत्युंजय साधना का महायज्ञ: श्री महामृत्युंजय मंदिर में गूंज रहा सवा लाख मंत्रों का दिव्य जाप

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महामृत्युंजय मंत्र क्यों है इतना प्रभावशाली? रोग, भय, संकट और अकाल मृत्यु के दोषों से मुक्ति की कामना लेकर उमड़ रहे श्रद्धालु
Tirentra times Korba**//**// कोरबा, 1 जून। सनातन धर्म में पुरुषोत्तम मास को भगवान विष्णु एवं भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने वाला अत्यंत पुण्यदायी काल माना गया है। इसी पावन अवसर पर नगर निगम कॉलोनी स्थित श्री श्री 108 श्री महामृत्युंजय मंदिर में 1 जून से 7 जून 2026 तक सात दिवसीय सामूहिक महामृत्युंजय मंत्र जाप एवं दशांश हवन महाअनुष्ठान का शुभारंभ श्रद्धा, भक्ति और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ।
यह दिव्य आयोजन दिगंबर अखिलेश पुरी जी महाराज, दशनाम नागा संन्यासी, श्री पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के कृपापात्र एवं मंदिर पुरोहित पंडित नागेश्वर पुरी गोस्वामी जी के सान्निध्य और मार्गदर्शन में संपन्न हो रहा है। आयोजन में क्षेत्रभर के श्रद्धालु बड़ी संख्या में सहभागिता कर भगवान शिव से आरोग्य, सुख-समृद्धि, दीर्घायु एवं विश्व कल्याण की प्रार्थना कर रहे हैं।
क्या है महामृत्युंजय मंत्र का महत्व?
महामृत्युंजय मंत्र को वेदों का सबसे शक्तिशाली और चमत्कारी मंत्र माना गया है। ऋग्वेद और यजुर्वेद में वर्णित यह मंत्र भगवान शिव को समर्पित है। धार्मिक मान्यता है कि इस मंत्र के नियमित जाप से रोग, भय, मानसिक तनाव, नकारात्मक ऊर्जा, ग्रहबाधा एवं जीवन के अनेक संकटों का निवारण होता है।
पंडित नागेश्वर पुरी गोस्वामी जी के अनुसार, महामृत्युंजय मंत्र केवल अकाल मृत्यु से रक्षा का ही नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आत्मबल, मानसिक शांति और आध्यात्मिक जागृति का भी स्रोत है। यही कारण है कि कठिन परिस्थितियों, रोगों एवं संकट के समय इस मंत्र के जाप का विशेष विधान बताया गया है।
पुरुषोत्तम मास में क्यों बढ़ जाता है मंत्र जाप का महत्व?
धर्मशास्त्रों के अनुसार पुरुषोत्तम मास में किया गया जप, तप, दान, पूजा एवं साधना सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना अधिक फलदायी मानी जाती है। इस दौरान भगवान शिव और भगवान विष्णु की आराधना से व्यक्ति को विशेष पुण्यफल प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस माह में किए गए महामृत्युंजय मंत्र जाप से परिवार में सुख-शांति, स्वास्थ्य, समृद्धि तथा आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
सवा लाख महामृत्युंजय मंत्र जाप और दशांश हवन
सात दिवसीय इस महाअनुष्ठान में सामूहिक रूप से सवा लाख (1,25,000) महामृत्युंजय मंत्रों का जाप किया जा रहा है। साथ ही श्रद्धालुओं के नाम और गोत्र से विशेष संकल्प लेकर वैदिक रीति-रिवाज से दशांश हवन भी संपन्न कराया जा रहा है।
आयोजकों के अनुसार मंत्र जाप के पूर्ण होने पर 7 जून को विशेष पूर्णाहुति एवं दशांश हवन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हुआ वातावरण
अनुष्ठान प्रारंभ होने के साथ ही मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, हर-हर महादेव के जयघोष और भक्ति रस का अद्भुत वातावरण निर्मित हो गया है। श्रद्धालुओं का कहना है कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से न केवल व्यक्तिगत जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है, बल्कि समाज में सद्भाव, आध्यात्मिक चेतना और नैतिक मूल्यों को भी मजबूती मिलती है।
प्रतिदिन का कार्यक्रम
प्रातः 8:00 बजे – सामूहिक महामृत्युंजय मंत्र जाप
दिनभर – विशेष पूजन एवं संकल्प अनुष्ठान
सायं 6:30 बजे – महाआरती
7 जून – पूर्णाहुति एवं दशांश हवन
आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालु भक्तों से इस दुर्लभ एवं पुण्यदायी अनुष्ठान में सहभागिता कर भगवान महामृत्युंजय का आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील की है।
संपर्क सूत्र
📞 7354813647
📞 7389727625

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