August 14, 2026

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विश्व पर्यावरण दिवस विशेष: कोरबा की हवा, पानी और जमीन को कौन-कौन कर रहा प्रदूषित? जानिए जिले के प्रमुख प्रदूषण स्रोत

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ऊर्जा नगरी’ की पहचान के साथ पर्यावरणीय चुनौतियां भी बड़ी, उद्योगों से लेकर प्लास्टिक और यातायात तक बढ़ा रहे दबाव

Tirentra Time’s Korba **//**//* कोरबा। छत्तीसगढ़ की ऊर्जा राजधानी कहलाने वाला कोरबा जिला देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल है। यहां स्थित कोयला खदानें, ताप विद्युत संयंत्र,  उद्योग और बढ़ती शहरी गतिविधियां विकास की नई इबारत लिख रही हैं, लेकिन इसके साथ ही पर्यावरण प्रदूषण की चुनौती भी लगातार गंभीर होती जा रही है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर यह जानना जरूरी है कि जिले में कौन-कौन से विभाग, उद्योग और गतिविधियां पर्यावरण प्रदूषण के प्रमुख कारण बन रहे हैं।
1. कोयला खनन परियोजनाएं: धूल और प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत
कोरबा जिले में संचालित एसईसीएल (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) की गेवरा, दीपका, कुसमुंडा जैसी विशाल ओपन कास्ट खदानें बड़ी मात्रा में धूल प्रदूषण उत्पन्न करती हैं।
प्रमुख प्रभाव:
कोयला उत्खनन से उड़ने वाली धूल
ब्लास्टिंग से वायु एवं ध्वनि प्रदूषण
भारी वाहनों की आवाजाही से धूल का फैलाव
खदानों से निकलने वाले अपशिष्ट का पर्यावरण पर असर
2. ताप विद्युत संयंत्र (थर्मल पावर प्लांट)
कोरबा जिले में स्थित एनटीपीसी, सीएसईबी एवं निजी ताप विद्युत संयंत्र कोयले से बिजली उत्पादन करते हैं।
प्रमुख प्रदूषण:
फ्लाई ऐश (राख) का उत्सर्जन
सल्फर डाइऑक्साइड एवं नाइट्रोजन ऑक्साइड गैसें
राख बांधों से जल एवं भूमि प्रदूषण
धुएं से वायु गुणवत्ता प्रभावित
3.  उद्योग
जिले में संचालित बड़े  उद्योगों की औद्योगिक गतिविधियां भी पर्यावरण पर प्रभाव डालती हैं।
प्रभाव:
औद्योगिक अपशिष्ट
रासायनिक उत्सर्जन
जल संसाधनों पर दबाव
ठोस अपशिष्ट का निस्तारण
4. परिवहन एवं यातायात विभाग
कोयला परिवहन में लगे हजारों भारी वाहन प्रतिदिन सड़कों पर चलते हैं।
परिणाम:
डीजल वाहनों से धुआं
सड़क धूल में वृद्धि
ध्वनि प्रदूषण
कार्बन उत्सर्जन में बढ़ोतरी
5. नगर निगम क्षेत्र एवं ठोस अपशिष्ट
शहरी क्षेत्रों में बढ़ती आबादी के साथ कचरे की मात्रा भी बढ़ रही है।
समस्याएं:
प्लास्टिक कचरा
खुले में कचरा फेंकना
नालों में अपशिष्ट
कचरा जलाने से जहरीला धुआं
6. जल संसाधनों पर बढ़ता दबाव
औद्योगिक एवं घरेलू गतिविधियों के कारण जल स्रोतों पर भी असर पड़ रहा है।
प्रमुख चुनौतियां:
नदियों एवं नालों में अपशिष्ट
भूजल स्तर में गिरावट
जल गुणवत्ता में कमी
राख एवं औद्योगिक अपशिष्ट का प्रभाव
7. निर्माण कार्य एवं अवैध उत्खनन
शहरी विस्तार और निर्माण गतिविधियां भी प्रदूषण बढ़ाने में योगदान देती हैं।
प्रभाव:
निर्माण स्थलों से धूल
मलबे का अनुचित निपटान
हरित क्षेत्र में कमी
8. वन क्षेत्र में अतिक्रमण और कटाई
कोरबा का बड़ा हिस्सा वन क्षेत्र से आच्छादित है, लेकिन विकास परियोजनाओं एवं अन्य कारणों से वन क्षेत्र पर दबाव बढ़ा है।
परिणाम:
जैव विविधता को नुकसान
वन्यजीवों का प्रभावित होना
तापमान में वृद्धि
प्राकृतिक संतुलन पर असर
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
विशेषज्ञों के अनुसार कोरबा में प्रदूषण की समस्या का समाधान केवल सरकारी विभागों के भरोसे संभव नहीं है। उद्योगों, प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों को मिलकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य करना होगा।
पर्यावरण बचाने के लिए जरूरी कदम
अधिक से अधिक वृक्षारोपण
✔ प्लास्टिक का कम उपयोग
✔ प्रदूषण नियंत्रण मानकों का पालन
✔ राख एवं औद्योगिक अपशिष्ट का वैज्ञानिक प्रबंधन
✔ सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा
✔ जल स्रोतों का संरक्षण
✔ पर्यावरणीय नियमों का सख्ती से पालन
संदेश
विश्व पर्यावरण दिवस केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा, निर्मल जल और सुरक्षित प्रकृति का संकल्प है। ऊर्जा उत्पादन में देश को रोशन करने वाला कोरबा तभी सच्चे अर्थों में विकास का मॉडल बन सकेगा, जब औद्योगिक प्रगति के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी समान प्राथमिकता दी जाएगी।

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