August 14, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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योग, ध्यान और संस्कारों की त्रिवेणी से गूंजा दादर: बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और सकारात्मक सोच का हुआ संचार

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त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**// कोरबा। ग्रीष्मकालीन अवकाश को बच्चों के लिए उपयोगी, प्रेरणादायी और संस्कारमय बनाने के उद्देश्य से कन्नौजिया राठौर समाज नवचेतना समिति (इकाई) कोरबा द्वारा श्री आनंदम भवन, मैगजीन भाठा, दादर में एक दिवसीय ध्यान, योग, यज्ञ-हवन एवं व्यक्तित्व विकास शिविर का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बच्चों एवं अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर भारतीय संस्कृति और योग परंपरा से जुड़ने का संदेश दिया।
शिविर में कोरबा योगासन स्पोर्ट्स एसोसिएशन के योगाचार्य दुर्गेश राठौर, योग शिक्षिका श्रीमती विनीता दीक्षित तथा श्रीमती दुर्गेश तिवारी ने बच्चों को विभिन्न योगासनों, प्राणायाम और ध्यान की विधियों का अभ्यास कराया। प्रशिक्षकों ने सरल एवं रोचक तरीके से योग के महत्व को समझाते हुए बताया कि नियमित योगाभ्यास से शरीर स्वस्थ, मन शांत और विचार सकारात्मक बने रहते हैं।
कार्यक्रम के दौरान यज्ञ-हवन के माध्यम से बच्चों को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों एवं आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने का प्रयास किया गया। साथ ही व्यक्तित्व विकास सत्र में आत्मविश्वास, समय प्रबंधन, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और लक्ष्य निर्धारण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रेरक मार्गदर्शन दिया गया।

 

 

 

विशेषज्ञों ने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी दौर में बच्चों पर पढ़ाई और परीक्षा का दबाव बढ़ता जा रहा है। ऐसे में योग और ध्यान न केवल तनाव कम करने में सहायक हैं, बल्कि स्मरण शक्ति, एकाग्रता और सीखने की क्षमता को भी मजबूत बनाते हैं। नियमित अभ्यास बच्चों को मानसिक रूप से सशक्त बनाकर जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करता है।
शिविर में उपस्थित अभिभावकों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों को मोबाइल और डिजिटल दुनिया की निर्भरता से दूर कर उन्हें स्वस्थ, संस्कारित और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम का वातावरण पूरे समय उत्साह, ऊर्जा और सकारात्मकता से सराबोर रहा। अंत में आयोजकों ने संकल्प व्यक्त किया कि भविष्य में भी बच्चों के सर्वांगीण विकास और समाज में संस्कारों के संरक्षण के लिए इस प्रकार के रचनात्मक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाते रहेंगे।
यह शिविर केवल योग प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा, आत्मबल और नैतिक मूल्यों को जागृत करने का एक सशक्त अभियान बनकर उभरा।

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