कोरबा में बिजली व्यवस्था ध्वस्त! निहारिका समेत पाड़ीमार जोन में जनता बेहाल, विभाग बना मूकदर्शक



घंटों गुल रहती है बिजली, शिकायत नंबर बंद, ऑनलाइन सिस्टम फेल — आखिर मेंटेनेंस के नाम पर हर साल करोड़ों का खेल किसके लिए?
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//कोरबा। शहर के पाड़ीमार जोन अंतर्गत निहारिका सहित आसपास की कॉलोनियों में बिजली विभाग की लापरवाही अब लोगों के गुस्से का सबसे बड़ा कारण बन चुकी है। भीषण गर्मी के बीच लगातार घंटों बिजली गुल रहने से आम जनता का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों पर इसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा। हालत यह है कि अब लोग खुलेआम कहने लगे हैं कि बिजली विभाग केवल बिल वसूलने में सक्रिय है, सुविधा देने में नहीं।
पिछले कई दिनों से क्षेत्र में दिन और रात किसी भी समय बिजली काट दी जा रही है। न तो कोई पूर्व सूचना दी जाती है और न ही यह बताया जाता है कि आखिर फॉल्ट कहां है और सप्लाई कब तक बहाल होगी। उमस और तपती गर्मी में छोटे बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान हैं। घरों में पानी की सप्लाई ठप हो रही है, इन्वर्टर जवाब दे चुके हैं और व्यापारियों का कारोबार चौपट हो रहा है।
क्षेत्र में लोगों के बीच अब बिजली विभाग की कार्यप्रणाली मजाक का विषय बन चुकी है। लोग तंज कसते हुए कह रहे हैं —
“बिजली कब आएगी? मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ!”
यह तंज सीधे तौर पर विभाग की बदहाल व्यवस्था और अफसरों की संवेदनहीनता को उजागर करता है।
सबसे शर्मनाक स्थिति शिकायत व्यवस्था की सामने आ रही है। विभाग द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर अक्सर बंद मिलते हैं। लोग घंटों फोन मिलाते रहते हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिलता। मजबूरी में उपभोक्ता जब बिजली कार्यालय पहुंचते हैं, तो वहां बैठे कर्मचारियों को यह तक पता नहीं रहता कि संबंधित लाइनमैन कहां हैं और किस क्षेत्र में क्या खराबी आई है।
ऑनलाइन शिकायत प्रणाली भी पूरी तरह अविश्वसनीय साबित हो रही है। लोगों का आरोप है कि बिना बिजली चालू हुए ही मोबाइल पर “समस्या का समाधान हो गया” का मैसेज भेज दिया जाता है। इससे साफ जाहिर होता है कि विभाग केवल कागजों और पोर्टल पर काम पूरा दिखाने में लगा हुआ है, जबकि जमीनी हकीकत पूरी तरह अलग है।
अब सबसे बड़ा सवाल मेंटेनेंस व्यवस्था पर खड़ा हो रहा है। हर वर्ष बरसात और आंधी से पहले बिजली विभाग बड़े-बड़े दावे करता है कि लाइन सुधार, तार बदलने, ट्रांसफार्मर जांच और पेड़ों की कटाई का व्यापक मेंटेनेंस किया गया है। लेकिन पहली तेज गर्मी और हल्की हवा में ही पूरा सिस्टम ध्वस्त हो जाता है। आखिर अगर समय पर मेंटेनेंस होता है तो हर साल वही संकट क्यों पैदा होता है?
लोगों के बीच अब यह चर्चा भी तेज हो गई है कि कहीं मेंटेनेंस के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति और बजट का खेल तो नहीं चल रहा? आखिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी बिजली व्यवस्था इतनी बदहाल क्यों है? क्या अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी या हर साल जनता इसी तरह अंधेरे में तड़पती रहेगी?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अभी मानसून शुरू भी नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में तेज आंधी-तूफान और बारिश का दौर शुरू होगा। यदि अभी यह स्थिति है तो बरसात में शहर की बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। लोगों को डर है कि आने वाले समय में घंटों नहीं बल्कि कई-कई दिनों तक ब्लैकआउट जैसी स्थिति बन सकती है।
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों से मांग की है कि पाड़ीमार जोन सहित निहारिका और आसपास के क्षेत्रों की बिजली व्यवस्था की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही मेंटेनेंस कार्यों की वास्तविकता सामने लाई जाए और लापरवाह अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
अब जनता पूछ रही है —
क्या बिजली विभाग केवल बिल वसूली का केंद्र बनकर रह गया है?
क्या आम जनता की परेशानी सुनने वाला कोई नहीं बचा?
और सबसे बड़ा सवाल —
अगर हर साल मेंटेनेंस होता है, तो हर साल शहर अंधेरे में क्यों डूब जाता है?


