कोरबा में फिर बेखौफ डीजल चोर गिरोह की वापसी! इंडियन ऑयल टर्मिनल के सामने रात दर रात वारदात — आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है यह खेल?


त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/** कोरबा। लंबे समय तक शांत रहने के बाद कोरबा जिले में डीजल चोर गिरोह एक बार फिर सक्रिय हो गया है और इस बार उसका दुस्साहस पहले से कहीं अधिक दिखाई दे रहा है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के गोपालपुर टर्मिनल के सामने मुख्य मार्ग पर खड़े भारी वाहनों को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि इतनी बड़ी वारदातें आखिर किसके इशारे पर और किसके संरक्षण में हो रही हैं?
सूत्रों के अनुसार अज्ञात बदमाश रात के अंधेरे का फायदा उठाकर ट्रकों और मालवाहक वाहनों के टैंकों को तोड़कर हजारों लीटर डीजल पार कर दे रहे हैं। बीती रात भी कई वाहनों से बड़ी मात्रा में डीजल चोरी किए जाने की जानकारी सामने आई है। जब कुछ चालकों को इसकी भनक लगी और उन्होंने विरोध किया, तो आरोपियों ने उन्हें खुलेआम धमकाकर चुप करा दिया। इससे स्पष्ट है कि गिरोह न केवल संगठित है, बल्कि बेखौफ भी।
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि इस गिरोह में कई सदस्य शामिल हैं, जिन्हें हिस्ट्रीशीटर बताया जा रहा है। यह गिरोह पूरी पेशेवर शैली में वारदात को अंजाम देता है। कथित तौर पर स्कॉर्पियो वाहन में सवार होकर देर रात इलाके में चक्कर लगाया जाता है, सड़क किनारे खड़े वाहनों की रेकी की जाती है और मौका मिलते ही टैंक तोड़कर डीजल निकाल लिया जाता है। वारदात के तुरंत बाद आरोपी तेज रफ्तार से फरार हो जाते हैं।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि इतने संवेदनशील क्षेत्र—जहां रोजाना भारी मात्रा में ईंधन का परिवहन होता है—वहां लगातार चोरी की घटनाएं होना कई सवाल खड़े करता है। बिना स्थानीय स्तर पर किसी की मिलीभगत या जानकारी के इस तरह की सुनियोजित गतिविधियां संभव नहीं लगतीं। क्या गिरोह को अंदरूनी सूचना मिल रही है? क्या कोई प्रभावशाली संरक्षण इन्हें निर्भीक बना रहा है? यह अब जांच का विषय बन चुका है।
गौरतलब है कि कुछ वर्ष पूर्व भी इसी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर डीजल चोरी की घटनाएं सामने आई थीं। उस समय पेट्रोल पंप संचालकों और वाहन मालिकों की शिकायत के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की थी, जिसके परिणामस्वरूप घटनाएं थम गई थीं। लेकिन अब एक बार फिर नकाबपोश गिरोह की सक्रियता से वाहन चालकों और ट्रांसपोर्टरों में दहशत का माहौल है।
ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि शीघ्र कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह गिरोह और अधिक संगठित होकर बड़े स्तर पर आर्थिक नुकसान पहुंचा सकता है। क्षेत्र में गश्त बढ़ाने, सीसीटीवी निगरानी सख्त करने और संदिग्ध गतिविधियों की गहन जांच की मांग उठ रही है।
अब निगाहें प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं। सवाल साफ है—क्या इस बेखौफ गिरोह पर शिकंजा कसा जाएगा, या फिर डीजल चोरी का यह काला कारोबार यूं ही फलता-फूलता रहेगा?

