February 11, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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कोरबा के महर्षि वाल्मीकि आश्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की गौरा-गौरी पूजा, प्रदेश की सुख-समृद्धि व खुशहाली की कामना

 

त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ***//कोरबा, 11 जनवरी 2026
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कोरबा नगर स्थित पावन एवं ऐतिहासिक महर्षि वाल्मीकि आश्रम में पहुंचकर भगवान शिव एवं माता पार्वती की आस्था का प्रतीक गौरा-गौरी की विधिवत पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने आश्रम परिसर में स्थापित भगवान श्रीराम, माता सीता एवं लक्ष्मण की मूर्तियों की भी श्रद्धा भाव से पूजा कर प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने वैदिक मंत्रोच्चार एवं पारंपरिक विधि-विधान के साथ पूजा संपन्न करते हुए कहा कि महर्षि वाल्मीकि आश्रम न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह हमारी सनातन संस्कृति, आस्था और नैतिक मूल्यों का सजीव प्रतीक भी है। यह स्थल समाज को शांति, सद्भाव, एकता और भाईचारे का संदेश देता है और हमारी सांस्कृतिक विरासत को सुदृढ़ करता है।

 

 

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि गौरा-गौरी पूजा छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपराओं का अभिन्न हिस्सा है। भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना से जनकल्याण, प्राकृतिक संतुलन, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना को बल मिलता है। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और लोगों को अपनी परंपराओं से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।
इस पावन अवसर पर वाणिज्य, उद्योग, श्रम, आबकारी एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन, कटघोरा विधायक श्री प्रेमचंद पटेल, नगर निगम महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत, पूर्व गृह मंत्री श्री ननकी राम कंवर, आईजी डॉ. संजीव शुक्ला, कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत, पुलिस अधीक्षक श्री सिद्धार्थ तिवारी, अपर कलेक्टर श्री देवेंद्र पटेल, श्री गोपाल मोदी, श्री पनत राम भगत, श्री बीरबल सिंह, श्री रघुराज सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
पूरे कार्यक्रम के दौरान जनजाति समुदाय के बड़ी संख्या में लोग भी पारंपरिक वेशभूषा में उपस्थित रहे, जिससे आयोजन की गरिमा और अधिक बढ़ गई। मुख्यमंत्री के आगमन एवं पूजा-अर्चना को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया।
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र रहा, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकजुटता का भी सशक्त संदेश देता नजर आया।

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